'नाबालिग से दुष्कर्म मामलों में पीड़ित की उम्र जितनी कम, दोषी को सजा उतनी अधिक...' पंजाब-हरियाणा HC का बड़ा फैसला
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने बच्चों से दुष्कर्म मामलों में सजा के नए मानक तय किए हैं। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित की उम्र जितनी कम होगी, सजा उतनी अधिक होगी, ...और पढ़ें
-1775881125417_m.webp)
नाबालिग से दुष्कर्म मामलों में पीड़ित की उम्र जितनी कम, दोषी को सजा उतनी अधिक: हाई कोर्ट
HighLights
पीड़ित की कम उम्र पर मिलेगी अधिक कठोर सजा
आरोपितों की संख्या बढ़ने पर सजा और कठोर होगी
मौत की सजा उम्रकैद में बदली, 25 साल कठोर कारावास
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने बच्चों के साथ दुष्कर्म मामलों में सजा तय करने के लिए एक नया मानक प्रस्तुत किया है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित की उम्र जितनी कम होगी, अपराध की सजा उतनी अधिक होनी चाहिए। साथ ही, अपराधियों की संख्या बढ़ने पर सजा और कठोर होगी।
मामला लुधियाना में चार साल सात महीने की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या से जुड़ा है। आरोपित 28 वर्षीय सोनू सिंह ने बच्ची को उसके दादा की चाय की दुकान से बहला-फुसलाकर ले जाकर यह जघन्य अपराध किया था। ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। मामला हाई कोर्ट में मौत की सजा की पुष्टि और आरोपित की अपील के रूप में पहुंचा।
जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने कहा कि भारत में पोक्सो मामलों में सजा तय करने के स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं, जिससे फैसलों में असंगति आती है। इसी कमी को दूर करने के लिए कोर्ट ने मानक तैयार किया। इसके तहत सजा तय करने का आधार सहमति की कानूनी उम्र को माना जाएगा। जैसे-जैसे पीड़ित की उम्र इस आधार से कम होती जाएगी, सजा बढ़ती जाएगी।
यदि अपराध में एक से अधिक आरोपित हों, तो सजा और कठोर होगी। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता की उम्र पांच साल से कम थी और आरोपित अकेला था। इस आधार पर दुष्कर्म के लिए 25 साल के कठोर कारावास को कोर्ट ने उचित माना। हत्या के लिए आजीवन कारावास दिया गया, जिसमें कम से कम 50 साल तक बिना किसी रिमिशन के जेल में रहना अनिवार्य होगा।
खबरें और भी
हाई कोर्ट ने सबूतों के आधार पर दोषसिद्धि बरकरार रखी लेकिन यह भी कहा कि हत्या पूर्वनियोजित नहीं थी, बल्कि दुष्कर्म के सुबूत मिटाने के लिए घबराहट में की गई थी। इसी आधार पर इसे “रेयरेस्ट आफ रेयर” की श्रेणी में न रखते हुए मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया।