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    पंजाब कांग्रेस में बगावत! राजा वडिंग के खिलाफ चन्नी गुट ने खोला मोर्चा, रंधावा की शाह से मुलाकात ने बढ़ाई हलचल

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 01:09 PM (IST)

    पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल के बाद असंतोष खुलकर सामने आ गया है। चन्नी खेमे ने राजा वड़िंग के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। मनीष तिवारी और सुखजिंद ...और पढ़ें

    HighLights

    1. चन्नी कैंप ने राजा वडिंग के नेतृत्व को सीधी चुनौती दी।

    2. तरसेम डीसी ने कहा वडिंग के नेतृत्व में सरकार नहीं बनेगी।

    3. मनीष तिवारी और सुखजिंदर रंधावा ने भी असंतोष व्यक्त किया।

    रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल के बाद शुरू हुई अंदरूनी खींचतान अब खुली शक्ति-परीक्षा में बदलती नजर आ रही है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को लेकर असंतोष अब बंद कमरों से बाहर आ चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के मोरिंडा स्थित आवास पर लगातार दूसरे दिन नेताओं का जमावड़ा लगा, जहां पार्टी नेतृत्व और खासकर राजा वडिंग की कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठे।

    पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि पंजाब कांग्रेस के भीतर अब लड़ाई सिर्फ पदों की नहीं, बल्कि 2027 के सत्ता चेहरे की है। चन्नी को कांग्रेस कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाए जाने के बाद उनके आवास पर समर्थक नेताओं का पहुंचना अपने आप में बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। बैठक में पहुंचे कांग्रेस नेता तरसेम सिंह डीसी ने सीधे राजा वडिंग को निशाने पर लिया।

    तरसेम डीसी ने कहा-

    राजा वडिंग के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार नहीं बना सकती क्योंकि जनता उनका समर्थन नहीं करती। जनता चाहती थी कि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बदला जाए। लोग चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का अगला मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं।


    यह बयान सिर्फ व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि चन्नी कैंप की रणनीतिक लाइन माना जा रहा है। राजा वडिंग की स्वीकार्यता पर सवाल खड़े करो और चन्नी को विकल्प के रूप में स्थापित करो।

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    वड़िंग के खिलाफ खुली बगावत

    सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मौजूद कई नेताओं और पूर्व विधायकों ने भी दो टूक कहा कि राजा वडिंग को संगठन की कमान नहीं दी जानी चाहिए थी। नेताओं का तर्क था कि 2022 की हार और उसके बाद के राजनीतिक प्रदर्शन को देखते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को बदलाव की उम्मीद थी।

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    हालांकि, हाईकमान ने वही नेतृत्व बरकरार रखकर गलत संदेश दिया। एक वरिष्ठ नेता ने यहां तक कहा कि यदि पार्टी मौजूदा ढांचे के साथ आगे बढ़ती रही तो जमीनी स्तर पर कांग्रेस की वापसी मुश्किल हो सकती है।

    मनीष तिवारी की नाराजगी 

    इस सियासी हलचल के बीच चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी की नाराजगी ने आग में घी डालने का काम किया है। चुनावी समितियों से बाहर किए जाने के बाद तिवारी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “काश, व्यक्तियों और संस्थाओं की असुरक्षा का भी कोई इलाज होता। कांग्रेस ने मुझे 45 वर्षों में बहुत कुछ दिया है और मैंने अपना पूरा वयस्क जीवन पार्टी को समर्पित किया है।” तिवारी का यह बयान कांग्रेस हाईकमान के फैसलों पर अप्रत्यक्ष लेकिन तीखा हमला माना जा रहा है।

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    रंधावा पहुंचे अमित शाह से मिलने

    उधर, पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा की दिल्ली गतिविधियों ने भी अटकलों को हवा दी है। सूत्रों के अनुसार रंधावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पहुंचे। हालांकि आधिकारिक तौर पर कुछ स्पष्ट नहीं है, लेकिन कांग्रेस के भीतर इसे असंतोष के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पंजाब कांग्रेस इस समय कई शक्ति केंद्रों में बंट चुकी है।

    एक तरफ संगठन पर राजा वडिंग की पकड़ है, दूसरी तरफ चन्नी अपना जनाधार और दलित समीकरण सामने रख रहे हैं, जबकि तिवारी और रंधावा जैसे नेता अलग दबाव समूह बनाते दिख रहे हैं। सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह है कि चन्नी कैंप अब सीधे राजा वडिंग की नेतृत्व क्षमता को चुनौती दे रहा है।

    यदि हाईकमान ने जल्द डैमेज कंट्रोल नहीं किया तो पंजाब कांग्रेस में यह असंतोष खुली बगावत में बदल सकता है। 2027 अभी दूर है, लेकिन सत्ता की जंग कांग्रेस के भीतर अभी से तेज हो गई है।

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