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    पंजाब निकाय चुनाव: EVM बनाम बैलेट पेपर विवाद पर HC में तीखी बहस, अदालत ने सुरक्षित रखा फैसला

    Updated: Fri, 22 May 2026 08:02 AM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में नगर निकाय चुनावों में ईवीएम और बैलेट पेपर के इस्तेमाल पर तीखी बहस हुई, जिसमें पंजाब राज्य चुनाव आयोग और भारतीय चुनाव आ ...और पढ़ें

    पंजाब- हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो

    पंजाब- हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो

    HighLights

    1. ईवीएम बनाम बैलेट पेपर पर हाईकोर्ट में तीखी बहस हुई

    2. दोनों चुनाव आयोगों ने देरी के लिए एक-दूसरे को दोषी ठहराया

    3. अदालत ने सभी दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब में नगर निकाय चुनावों को लेकर ईवीएम और बैलेट पेपर के इस्तेमाल पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में गुरुवार को लंबी और तीखी बहस हुई। सुनवाई के दौरान पंजाब राज्य चुनाव आयोग और भारतीय चुनाव आयोग ने एक-दूसरे पर देरी और समन्वय की कमी के आरोप लगाए।

    पंजाब राज्य चुनाव आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि आयोग शुरू से एम-2 मॉडल की ईवीएम मांग रहा था, क्योंकि राज्य में पहले से उसी मॉडल का उपयोग होता आया है और कर्मचारियों को उसी की ट्रेनिंग है। लेकिन बाद में बताया गया कि एम-2 मॉडल अपनी निर्धारित आयु पूरी कर चुका है, इसलिए अब एम-3 मॉडल की मशीनें ही उपलब्ध कराई जाएंगी। आयोग ने कहा कि इसके बाद एम-3 मशीनों के लिए फर्स्ट लेवल चेकिंग और तकनीकी प्रक्रिया की आवश्यकता बताई गई, जिससे देरी हुई।

    राज्य चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि उसने समय रहते भारतीय चुनाव आयोग, पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और विभिन्न राज्यों से मशीनें उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। हरियाणा और अन्य राज्यों से भी संपर्क किया गया, लेकिन मशीनों की उपलब्धता और परिवहन प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। आयोग ने कहा कि चुनाव सिर पर होने के कारण अब बैलेट पेपर ही व्यवहारिक विकल्प बचा है। अदालत को बताया गया कि नोडल अधिकारियों की रिपोर्ट में भी उल्लेख है कि मशीनों की जांच और तैयारी में 10 से 12 दिन लगेंगे तथा मशीनें 16 मई के बाद ही उपलब्ध हो पाएंगी।

    राज्य चुनाव आयोग ने दलील दी कि 26 मई को मतदान होना है और चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। लगभग 36 लाख मतदाताओं के लिए बैलेट पेपरों की छपाई आरंभ हो चुकी है तथा अब तक 40 से 50 लाख रुपये खर्च भी किए जा चुके हैं। आयोग ने कहा कि पोलिंग पार्टियों की ट्रेनिंग, मशीनों की सीलिंग, राजनीतिक दलों के एजेंटों की मौजूदगी में डेमो और अन्य प्रक्रियाओं के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा है।

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    वहीं भारतीय चुनाव आयोग की ओर से राज्य चुनाव आयोग के दावों का विरोध करते हुए कहा कि देरी पूरी तरह पंजाब राज्य चुनाव आयोग की ओर से हुई। अदालत को बताया गया कि राजस्थान से करीब 6300 बैलेट यूनिट और लगभग 5980 कंट्रोल यूनिट पंजाब के लिए रवाना कर दी गई हैं और वे रात तक पहुंच जाएंगी।

    चुनाव आयोग ने कहा कि मशीनों की कमी अब कोई मुद्दा नहीं है और पूरी प्रक्रिया एक दिन में पूरी की जा सकती है।दूसरी ओर भारत निर्वाचन आयोग की ओर से कहा कि राज्य चुनाव आयोग देरी के लिए स्वयं जिम्मेदार है। अदालत को बताया गया कि ईवीएम उधार लेने के लिए छह महीने पहले अनुरोध किया जाना चाहिए था, जबकि पंजाब ने जनवरी 2026 में प्रक्रिया शुरू की। निर्वाचन आयोग ने कहा कि राजस्थान से ईवीएम भेज दी गई हैं और वे गुरुवार रात तक पंजाब पहुंच जाएंगी।

    भारतीय चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि चुनाव ड्यूटी में लगने वाला स्टाफ पहले से प्रशिक्षित होता है और नई मशीनों के बारे में जानकारी देने में केवल 15 मिनट लगेंगे। आयोग ने अदालत को आश्वस्त किया कि फर्स्ट लेवल चेकिंग और कमीशनिंग प्रक्रिया में भी पूरा सहयोग दिया जाएगा ताकि चुनाव समय पर ईवीएम से कराए जा सकें। एक पक्ष ने हल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि मामला “ऐसे रिश्ते” जैसा हो गया है, जहां पहले सभी शर्तें रखी गईं और अब सब कुछ उपलब्ध होने के बावजूद शादी से इनकार किया जा रहा है। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया।