'ई-मेल शिकायतों पर FIR दर्ज करना खतरनाक', पंजाब-हरियाणा HC का सख्त रुख, पंजाब पुलिस को SOP बनाने का दिया निर्देश
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एनआरआई सेल में ईमेल शिकायतों पर बिना समुचित जांच के एफआईआर दर्ज करने की मौजूदा प्रक्रिया पर चिंता जताई है। अदालत ने इसे ...और पढ़ें

ई-मेल शिकायतों पर FIR दर्ज करना खतरनाक: HC
HighLights
ई-मेल शिकायतों पर बिना जांच FIR खतरनाक: हाईकोर्ट
नागरिक अधिकारों पर असर, कानून के उद्देश्य से भटकाव
पंजाब पुलिस को SOP बनाने, प्रशिक्षण देने का निर्देश
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने NRI सेल में ई-मेल के जरिए प्राप्त शिकायतों के आधार पर एफआईआर दर्ज किए जाने की मौजूदा प्रक्रिया पर चिंता जताई है। अदालत ने इसे चिंताजनक और खतरनाक स्थिति बताया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना समुचित प्राथमिक जांच के केवल ई-मेल शिकायतों के आधार पर आपराधिक मुकदमे दर्ज करना न केवल नागरिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि कानून के मूल उद्देश्य से भी भटकाव पैदा करता है।
मंदीप सिंह व अन्य मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं और इस दिशा में तत्काल सुधार की आवश्यकता है। सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (NRI) आरके जायसवाल ने अदालत को बताया कि विवाह के समय झूठे आश्वासनों के चलते कई महिलाएं विदेश जाकर उत्पीड़न और गंभीर अत्याचारों का सामना करती हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब ऐसे विवाद केवल महिला पक्ष तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि पुरुष पक्ष की ओर से भी शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे इन मामलों में संतुलित और सतर्क दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य हो गया है।
अदालत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जब एनआरआई सेल को ई-मेल के जरिए शिकायतें प्राप्त होती हैं, तो सबसे पहले आरोपों की सत्यता की गहन जांच की जानी चाहिए और यह तय किया जाना चाहिए कि कथित अपराध भारत की क्षेत्रीय अधिकारिता में आता भी है या नहीं।
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पीठ ने दो टूक कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों की रक्षा करना है, न कि किसी भी पक्ष को अवैध लाभ दिलाना। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह केवल सच्चाई ही सामने रखे।
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस आलोक जैन ने पंजाब पुलिस को निर्देश दिए कि ई-मेल के माध्यम से एनआरआई सेल में आने वाली शिकायतों से निपटने के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाए।
एडीजीपी (एनआरआई) ने अदालत को आश्वासन दिया कि न केवल एसओपी बनाई जाएगी, बल्कि संबंधित पुलिस अधिकारियों को इस तरह के मामलों में बुनियादी जांच, सत्यापन और संवेदनशीलता से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने एसओपी तैयार करने, समिति गठित कर विभिन्न दृष्टिकोणों से सुझाव लेने और उसका मसौदा रिकॉर्ड पर रखने के लिए पंजाब पुलिस को तीन महीने का समय दिया है।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि समझौते के तहत अगर शिकायतकर्ता को कोई राशि प्राप्त हुई है, तो उसे फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद में रखा जाए और उसका उपयोग न किया जाए।
इसी प्रकार, याचिकाकर्ता को भी शेष समझौता राशि फिक्स्ड डिपॉजिट में रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि भविष्य में समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर कोई भी पक्ष शर्तों से पीछे न हट सके। मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।