सेना से बीमारी के कारण बाहर हुए जवानों को हाई कोर्ट से राहत, 20% से कम दिव्यांग भी पेंशन का हकदार
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि सेवा के दौरान बढ़ी बीमारी के कारण सेना से बाहर किए ...और पढ़ें

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने दिव्यांगता पेंशन पर अहम फैसला सुनाया।
20% से कम दिव्यांगता पर भी पेंशन का हक।
मेडिकल आधार पर सेवामुक्त सैनिकों को बड़ी राहत।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। सेना से मेडिकल आधार पर बाहर किए गए कर्मियों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। एक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी सैनिक को सेवा अवधि के दौरान बढ़ी या गंभीर हुई बीमारी/दिव्यांगता के कारण सेवा से मुक्त किया गया है, तो केवल इस आधार पर उसे दिव्यांगता पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसकी दिव्यांगता 20 प्रतिशत से कम आंकी गई थी।
हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) द्वारा दिए गए दिव्यांगता पेंशन के आदेश को चुनौती दी गई थी। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने कहा कि जब सेवा से मुक्त किए जाने का वास्तविक कारण वही बीमारी या दिव्यांगता है, जो सेवा के दौरान बढ़ी, तो केंद्र यह नहीं कह सकता कि संबंधित सैनिक दिव्यांगता पेंशन का पात्र नहीं है।
अदालत ने साफ कहा कि सरकार यह साबित नहीं कर सकी कि संबंधित सैन्यकर्मी अपनी बीमारी के बावजूद बिना बाधा सेवा जारी रख सकता था।
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1992 में हुए थे सेवा मुक्त किया गया था पूर्व सैनिक
मामला एक ऐसे पूर्व सैनिक से जुड़ा था, जिसने नवंबर 1971 में भारतीय सेना ज्वाइन की थी और सितंबर 1992 तक सेवा दी। सेवा से मुक्त किए जाने के समय उसे ‘हेपाटो-इन्टेस्टाइनल अमीबायसिस’ बीमारी से पीड़ित पाया गया। मेडिकल आकलन में उसकी दिव्यांगता 15 से 19 प्रतिशत के बीच मानी गई, जो सामान्य 20 प्रतिशत सीमा से नीचे थी।
इसी आधार पर केंद्र सरकार ने दिव्यांगता पेंशन देने का विरोध किया। सरकार का तर्क था कि बीमारी न तो सैन्य सेवा से जुड़ी थी और न ही उससे बढ़ी थी।
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कोर्ट ने रिकाॅर्ड के आधार पर सुनाया फैसला
लेकिन हाई कोर्ट ने कहा कि जब रिकाॅर्ड यह दर्शाता है कि बीमारी के कारण सैनिक सेवा जारी रखने में सक्षम नहीं था और उसे मेडिकल आधार पर बाहर करना पड़ा, तो कानूनन उसे न्यूनतम 20 प्रतिशत दिव्यांगता मानते हुए पेंशन लाभ दिया जाएगा।
अदालत ने सुखविंदर सिंह मामले के सिद्धांत का हवाला देते हुए दोहराया कि यदि सेवा से बाहर किए जाने की वजह बनी दिव्यांगता 20 प्रतिशत से कम भी आंकी गई हो, तब भी पेंशन के उद्देश्य से उसे न्यूनतम 20 प्रतिशत माना जाएगा। इस फैसले को पूर्व सैनिकों के अधिकारों की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
