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    डेढ़ साल बाद भेजी केस प्रॉपर्टी की नहीं आई एफएसएल रिपोर्ट, हाई कोर्ट सख्त; एसएसपी लुधियाना को कार्रवाई के आदेश

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 10:03 AM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हत्या के प्रयास मामले में एफएसएल रिपोर्ट में असामान्य देरी पर नाराजगी जताते हुए लुधियाना के एसएसपी को जांच और कार्रवाई ...और पढ़ें

    ये AI जनरेटेड इमेज है।

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    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हत्या के प्रयास के एक मामले में फारेंसिक जांच में हुई भारी देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने पाया कि घटना के डेढ़ वर्ष से अधिक समय बाद केस प्रापर्टी फारेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजी गई और ट्रायल अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद उसकी जांच तक पूरी नहीं हुई।

    इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए हाई कोर्ट ने लुधियाना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह ने हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज मामले में आरोपी शिंदा की दूसरी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।

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    2024 के मामले में हो रही थी सुनवाई

    अदालत ने अपने आदेश में कहा, यह उल्लेख करना उचित होगा कि रिकार्ड के अनुसार केस प्रॉपर्टी घटना के डेढ़ वर्ष से अधिक समय बाद 16 जून 2026 को एफएसएल भेजी गई। जांच की बात तो दूर, ट्रायल भी अंतिम चरण में पहुंच चुका है, फिर भी केस प्रापर्टी की एफएसएल में जांच नहीं हुई है। इसलिए लुधियाना के एसएसपी को निर्देश दिया जाता है कि वे मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करें।

    मामला लुधियाना जिले के दाखा थाना में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार 15 नवंबर 2024 की शाम करीब सात बजे शिकायतकर्ता अपनी किराना दुकान पर मौजूद था। आरोप है कि आरोपित वहां पहुंचा, शिकायतकर्ता और उसकी पत्नी के साथ गाली-गलौज की और विरोध करने पर अपनी पैंट की कमर से रिवाल्वर निकालकर दो गोलियां चला दीं। एक गोली शिकायतकर्ता के दाहिने कंधे पर लगी, जबकि दूसरी उसकी पत्नी के सीने में लगी।

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    याचिका की सुनवाई के लिए एफएसएल रिपोर्ट का था इंतजार

    जमानत की मांग करते हुए आरोपी की ओर से कहा गया कि उसका कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है और वह एक वर्ष आठ माह से अधिक समय से जेल में बंद है। जांच पूरी हो चुकी है, दोनों घायल अस्पताल से छुट्टी पा चुके हैं और मुकदमे के जल्द समाप्त होने की संभावना भी नहीं है।

    राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने जान से मारने की नीयत से गोली चलाई थी। अभियोजन के सभी गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और अब केवल एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार है।

    आरोपी को मिली जमानत

    हाई कोर्ट ने कहा कि सभी गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है, आरोपी से कोई बरामदगी शेष नहीं है और रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है जिससे लगे कि जमानत मिलने पर वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगा। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि त्वरित सुनवाई का अधिकार प्रत्येक आरोपी का मौलिक अधिकार है और केवल एफएसएल रिपोर्ट में असामान्य देरी के कारण किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता।

    इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना आरोपी को नियमित जमानत देने का आदेश दिया।

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