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सरकारी अस्पतालों की बदहाली पर हाई कोर्ट सख्त, पंजाब में डॉक्टरों की भर्ती और आधुनिक सुविधाएं देने का आदेश

Published: Tue, 22 Sep 2026 12:46 PM (IST)

हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को सभी जिला अस्पतालों में आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं और डॉक्टरों की भर्ती सुनिश्चित करने के ...और पढ़ें

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को जिला अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने को कहा।

  2. मरीजों को बेहतर इलाज के लिए भटकना न पड़े, कोर्ट का निर्देश।

  3. डॉक्टरों, स्टाफ की भर्ती और सीटी स्कैन, एमआरआई सुविधा जरूरी।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को राज्य के सभी जिला अस्पतालों में आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मरीजों को बेहतर इलाज के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए।

चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने पंजाब सरकार को अनुपालन संबंधी शपथपत्र दाखिल करने का आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई पांच अक्टूबर के लिए तय की है।

खंडपीठ ने कहा कि राज्य से अपेक्षा है कि सभी जिला अस्पतालों में आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए। कोर्ट ने इससे पहले भी स्पष्ट किया था कि नागरिकों को चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

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केवल भवन और मशीनें पर्याप्त नहीं

जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि अस्पतालों में आधारभूत ढांचा तैयार कर देना ही पर्याप्त नहीं है। इन सुविधाओं को प्रभावी रूप से संचालित करने के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति भी जरूरी है। कोर्ट ने राज्य को आवश्यक डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों की भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत हो सके।

खंडपीठ ने पंजाब और हरियाणा में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और उनके संचालन से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों राज्यों से अपेक्षा जताई थी कि पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं को जल्द से जल्द कार्यशील किया जाएगा।

मलेरकोटला अस्पताल में CT स्कैन और MRI का मामला

यह मामला मलेरकोटला सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति की सुनवाई के दौरान प्रमुखता से सामने आया था। भिशम किंगर की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पंजाब सरकार के उस निर्णय पर सवाल उठाया था, जिसके तहत सिविल अस्पताल में सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा निजी एजेंसी के माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी।

कोर्ट ने कहा था कि बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य का दायित्व है। इसमें जिला और उपमंडल स्तर के अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा के लिए आवश्यक सीटी स्कैन और एमआरआइ जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी शामिल है।

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जिला अस्पतालों में सुविधाओं पर मांगी रिपोर्ट

हाई कोर्ट ने पहले ही राज्य को यह सुनिश्चित करने को कहा था कि आवश्यक चिकित्सा सेवाएं केवल कागजों पर उपलब्ध न रहें, बल्कि अस्पतालों में वास्तव में कार्यशील हों। अब खंडपीठ ने पंजाब सरकार से इन निर्देशों के अनुपालन की स्थिति शपथपत्र के माध्यम से बताने को कहा है।

पांच अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार की ओर से जिला अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं, चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की स्थिति तथा आवश्यक संसाधनों को लेकर जानकारी रखी जाएगी।

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