कनाडा में रहने वाले व्यक्ति को भगोड़ा घोषित करने का आदेश रद, यौन उत्पीड़न मामले में पंजाब-हरियाणा HC का अहम फैसला
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि कनाडा जा चुके व्यक्ति को भारत में पुराने पते पर भगोड़ा घोषित नहीं किया जा सकता। ...और पढ़ें

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो
HighLights
हाई कोर्ट ने भगोड़ा घोषित करने का आदेश रद्द किया।
कनाडा जा चुके व्यक्ति को भगोड़ा नहीं माना जा सकता।
सीआरपीसी धारा 82 प्रक्रिया का पालन अनिवार्य।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति पहले ही कनाडा जा चुका है, तो उसे भारत में उसके पुराने पते पर भगोड़ा (प्रोक्लेम्ड आफेंडर) घोषित नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यौन उत्पीड़न से जुड़े एक मामले में एक युवक को भगोड़ा घोषित करने के आदेश को रद कर दिया। जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को प्रोक्लेम्ड आफेंडर घोषित करने से पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-82 में निर्धारित प्रक्रिया का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है।
यह मामला उस याचिका से संबंधित था, जिसमें याचिकाकर्ता ने 12 जनवरी 2018 को नकोदर के सब डिवीजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसे भगोड़ा घोषित किया गया था। उसके खिलाफ 8 मई 2015 को जालंधर के नकोदर थाना में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-ई और 67-ए तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 354-ए के तहत एफआइआर दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि एफआइआर दर्ज होने के समय उसकी उम्र कम थी और उसे अग्रिम जमानत मिल चुकी थी।
याचिकाकर्ता के पिता कनाडा में रहते थे और उन्होंने उसे वहां बसाने के लिए स्पॉन्सर किया था। इसके बाद वह 9 अगस्त 2017 को भारत छोड़कर कनाडा चला गया। अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता को विश्वास था कि उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला समाप्त हो चुका है। जब उसकी मां भारत आईं, तब परिवार को पता चला कि उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया है।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उद्घोषणा के जरिए जब उसे तलब किया गया, उस समय वह संबंधित पते पर मौजूद नहीं था। इसलिए धारा-82 सीआरपीसी के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। इसका प्रमाण उसके पासपोर्ट से भी मिलता है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि भगोड़ा घोषित करने का आदेश त्रुटिपूर्ण है, क्योंकि अदालत ने यह नहीं बताया कि वह जानबूझकर फरार था या गिरफ्तारी से बचने के लिए छिपा था।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट को बताया गया कि दोनों पक्षों के बीच 6 दिसंबर 2025 को समझौता हो चुका है और एफआइआर रद कराने के लिए अलग से याचिका भी दायर की गई है। जस्टिस रोहित कपूर ने कहा कि उद्घोषणा जारी किए जाने की तारीख को याचिकाकर्ता दिए गए पते पर उपलब्ध नहीं था। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता को भगोड़ा घोषित करने का आदेश रद कर दिया।