गजब हाल! 75 साल के बुजुर्ग से केवल 16,890 रुपये वसूलने के लिए 14 साल घसीटा, हाईकोर्ट ने लगाई जबरदस्त फटकार
उच्च न्यायालय ने 16890 रुपये के लिए 14 साल मुकदमा लड़ने पर सरकार को फटकार लगाई। बुजुर्ग कर्मचारी को राहत मिली और राज्य ने याचिका वापस ले ली, पर फैसला ...और पढ़ें

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने ₹16,890 के लिए 14 साल के मुकदमे पर सरकार को फटकारा।
75 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी को कोर्ट तक घसीटने पर जताई नाराजगी।
सरकार की मुकदमेबाजी नीति में संरचनात्मक खामियों को उजागर किया।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। न्याय व्यवस्था का उद्देश्य न्याय दिलाना होता है, लेकिन कई बार यही व्यवस्था प्रक्रिया के बोझ तले अपना मूल उद्देश्य खो देती है। हाल ही में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में सामने आए एक मामले ने इस सच्चाई को उजागर कर दिया, जहां महज 16,890 की रिकवरी के लिए राज्य सरकार ने करीब 14 साल तक मुकदमा जारी रखा।
मामला किसी जटिल कानूनी विवाद का नहीं था, बल्कि एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से जुड़ी छोटी-सी राशि का था। कर्मचारी को 1999 में 24 साल की सेवा पूरी करने पर एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन का लाभ मिला था। लेकिन अक्टूबर 2007 में रिटायरमेंट के कुछ ही महीनों बाद यह लाभ वापस ले लिया गया, वेतन घटाया गया और रिटायरमेंट लाभों से रिकवरी कर ली गई।
इस फैसले से आहत कर्मचारी ने पंजाब रोडवेज वर्कर्स यूनियन के माध्यम से औद्योगिक विवाद उठाया। मामले की सुनवाई करने वाले ट्रिब्यूनल ने रिकवरी को अवैध ठहराते हुए रकम लौटाने के आदेश दे दिए। सामान्यत यहीं विवाद समाप्त हो जाना चाहिए था, लेकिन राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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हाईकोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि हैरानी की बात है, राज्य 2012 से इस मामूली राशि के लिए मुकदमा लड़ रहा है, जबकि कर्मचारी अब लगभग 75 वर्ष का हो चुका है और जीवन के अंतिम पड़ाव में उसे कोर्ट तक घसीटा गया। कोर्ट ने साफ किया कि मुद्दा राशि का नहीं, बल्कि अनुपात और विवेक का है।
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कोर्ट ने कहा-
यह मामला राज्य की मुकदमेबाजी प्रणाली में मौजूद संरचनात्मक खामियों को उजागर करता है। पंजाब की विवाद निपटान एवं मुकदमेबाजी नीति स्पष्ट रूप से कहती है कि छोटे वित्तीय मामलों, गैर-नजीर वाले मामलों और व्यक्तिगत सेवा विवादों में अपील से बचा जाए। इसके बावजूद यह केस विभागों, समितियों और अधिकारियों की कई स्तर की जांच पार करता हुआ हाई कोर्ट तक पहुंच गया।
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अनावश्यक विवादों से बचना अनिवार्य
कोर्ट ने कहा देश और दुनिया के अन्य न्यायिक तंत्रों में सरकारों के लिए मुकदमेबाजी को लेकर सख्त दिशा निर्देश हैं। यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों में राज्य को “माडल लिटिगेंट” के रूप में कार्य करने की अपेक्षा होती है, जहां अनावश्यक विवादों से बचना अनिवार्य है।
कोर्ट की टिप्पणी के बाद राज्य ने अपनी याचिका वापस ले ली, हालांकि उसने यह आग्रह किया कि ट्रिब्यूनल का फैसला भविष्य में मिसाल न बने। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि इस फैसले का लाभ अन्य कर्मचारियों को नहीं मिलेगा।
हाई कोर्ट में इस समय 4 लाख से अधिक मामले लंबित हैं और हर अनावश्यक अपील इस बोझ को बढ़ाती है। अदालत पहले भी सरकार को चेतावनी दे चुकी है कि केवल “विवाद के लिए विवाद” न करें।
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