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जज किराये के मकानों में क्यों रहे? DC-SSP के आवास खाली क्यों न करवा लिए जाए; हाईकोर्ट का पंजाब सरकार से सवाल

Published: Thu, 12 Mar 2026 04:04 PM (IST)

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मोहाली, मोगा और पठानकोट के सेशन जजों को सरकारी आवास न मिलने पर पंजाब सरकार ...और पढ़ें

मोहाली, मोगा और पठानकोट में सेशन जजों को बुनियानी सुविधाओं पर वंचित होने पर हाईकोर्ट सख्त।

 मोहाली, मोगा और पठानकोट में सेशन जजों को बुनियानी सुविधाओं पर वंचित होने पर हाईकोर्ट सख्त।

HighLights

  1. न्यायिक अधिकारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी

  2. मोहाली, मोगा, पठानकोट के सेशन जजों को आवास नहीं।

  3. हाईकोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख, चीफ सेक्रेटरी से जवाब तलब।

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। डीसी और एसएसपी सरकारी आवासों में रह रहे हैं तो सेशन जजों को किराये के मकानों में रहने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा। यह टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब मांगा है।

मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल की है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को फटकार लगाई है।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पंजाब के चीफ सेक्रेटरी से जवाब तलब करते हुए स्पष्ट किया कि अगर न्यायिक अधिकारियों के लिए सरकारी आवास उपलब्ध नहीं कराए जा रहे तो मोहाली, मोगा और पठानकोट के डीसी और एसएसपी के सरकारी मकानों को खाली करवाकर इन्हें सेशन जजों को देने पर भी विचार किया जा सकता है।

अदालत ने सरकार से पूछा कि ऐसा करने में आखिर बाधा क्या है। सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि इन तीनों जिलों का गठन एक दशक से भी अधिक समय पहले किया गया था, लेकिन इसके बावजूद यहां के सेशन जजों के लिए आज तक सरकारी आवास उपलब्ध नहीं कराए गए।

यह स्थिति न्यायिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं मानी जा सकती। अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को गरिमापूर्ण कार्य वातावरण और आवासीय सुविधाएं मिलना जरूरी है।

खंडपीठ ने यह भी कहा कि जब प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को सरकारी आवास उपलब्ध हैं और उन्हें किराए के मकानों में रहने की आवश्यकता नहीं पड़ती, तो फिर सेशन जजों को किराये के घरों में रहने के लिए मजबूर करना न्यायिक व्यवस्था की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

अदालत ने सरकार को यह भी याद दिलाया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा बनाए रखने के लिए बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला केवल तीन जिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब के विभिन्न जिलों में न्यायिक अधिकारियों के लिए पर्याप्त आवास और अदालतों के लिए आवश्यक कमरों की कमी से जुड़े व्यापक मुद्दे पर भी सुनवाई चल रही है।

अदालत इस बात की समीक्षा कर रही है कि क्या राज्य सरकार न्यायिक ढांचे को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है या नहीं। इससे पहले हाई कोर्ट मलेरकोटला जिले में भी इसी तरह की स्थिति पर सख्त रुख अपना चुका है।

अदालत ने वहां के डीसी और एसएसपी के सरकारी आवास खाली कराने के आदेश दिए थे ताकि न्यायिक अधिकारियों के लिए आवास उपलब्ध कराए जा सकें। अब मोहाली, मोगा और पठानकोट के मामले में भी अदालत ने पंजाब सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है।

खंडपीठ ने पंजाब के चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिया है कि वे इस मुद्दे पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें और बताएं कि आखिर सेशन जजों के लिए सरकारी आवास उपलब्ध कराने में देरी क्यों हो रही है। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई पर सरकार से अपेक्षा जताई है कि ठोस और स्पष्ट जवाब पेश किया जाए।

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