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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 12, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    पंजाब में देसी घी के 21 और खोये के 26 फीसदी सैंपल फेल, हाई कोर्ट ने अफसरों को लगाई फटकार; सरकार से मांगा जवाब

    Updated: Thu, 12 Dec 2024 05:00 AM (IST)

    पंजाब में देसी घी और खोये के सैंपल फेल होने पर हाई कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं और लोगों के जीवन को ख ...और पढ़ें

    Punjab News: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो (जागरण न्यू मीडिया)
    Punjab News: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो (जागरण न्यू मीडिया)

    HighLights

    1. याचिका में अधिकारियों पर आंखें मूंदे बैठे रहने का लगा आरोप
    2. लोगों के जीवन को खतरे में डालने के भी लगे आरोप
    3. हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से मांगा जवाब

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब में देसी घी के 21 व खोये के 26 प्रतिशत सैंपल मानकों को पूरा करने में विफल रहे हैं। इस संबंध में हाई कोर्ट में दाखिल की गई जनहित याचिका में हाल ही में किए गए कुछ सर्वेक्षणों का हवाला दिया है।

    हाई कोर्ट में दी गई याचिका में कहा गया कि संबंधित अधिकारी इस मामले में आंखें मूंदे हुए हैं और लोगों के जीवन को खतरे में डाल रहे हैं। जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब में मिलावटी दूध एवं दूध आधारित उत्पादों की बिक्री की बढ़ती समस्या को नियंत्रित करने पर सरकार को जवाब दायर करने का आदेश दिया है।

    'देश में रोजाना बड़ी मात्रा नकली या मिलावटी दूध बिकता है'

    एडवोकेट सुनैना ने एक रिपोर्ट का हवाला देकर कोर्ट को बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में प्रतिदिन बड़ा मात्रा में नकली या मिलावटी दूध बिकता है। भारत के 70 प्रतिशत से अधिक दुग्ध उत्पाद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत के दुग्ध उत्पादों की जांच नहीं की गई तो 2025 तक 87 प्रतिशत भारतीय घातक बीमारियां कैंसर आदि का शिकार हो सकते हैं। विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 89.2 प्रतिशत दुग्ध उत्पादों में किसी न किसी तरह की मिलावट पाई है।

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    आम लोगों को किया जाए जागरूक

    हाई कोर्ट को बताया गया कि भारत दुग्ध उत्पादन के मामले में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है, लेकिन यहां मिलावटी दुग्ध उत्पाद कहीं ज्यादा हैं।

    याची ने हाई कोर्ट से अपील की कि राज्य सरकार को निर्देश जारी कर दूध और दुग्ध उत्पादों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए और आम लोगों को जागरूक किया जाए कि वह कैसे मिलावटी दुग्ध उत्पादों की जांच कर सकते हैं।

    याचिका में इस मामले में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने व दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। याची ने बताया कि नकली दूध बनाने में घातक डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, सफेद पेंट, हाइड्रोपराक्साइड, वनस्पति तेल, फर्टिलाइजर जैसे घातक पदार्थों का इस्तेमाल होता है। यह पदार्थ स्वास्थ्य के लिए घातक हैं।

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