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'वोट इलाज रोकने के लिए नहीं मिले', स्वास्थ्य सुविधाओं पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को लगाई कड़ी फटकार

Published: Wed, 13 May 2026 12:35 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने जिला अस्पतालों में जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर पंजाब सरकार को कड़ी फटकार ...और पढ़ें

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को स्वास्थ्य ढांचे पर फटकारा।

  2. 55% मेडिकल ऑफिसर पद खाली, अदालत ने जताई नाराजगी।

  3. जिला अस्पतालों में एमआरआई, सीटी स्कैन, आईसीयू की कमी।

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे की खराब स्थिति को लेकर बुधवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को कड़ी फटकार का सामना करना पड़ा। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पंजाब सरकार से दो टूक कहा कि “आपको लोगों ने वोट दिया है, उन्हें बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रखने के लिए नहीं।”

अदालत ने जिला अस्पतालों में एमआरआई सीटी स्कैन स्कैन और आइसीयू जैसी अत्यावश्यक सुविधाओं के अभाव पर गहरी नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर एक कल्याणकारी राज्य अपने नागरिकों को जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधाएं देने से कैसे पीछे हट सकता है।

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष पंजाब सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में स्वीकार किया गया कि राज्य में नियमित मेडिकल ऑफिसर (जनरल) के 3665 स्वीकृत पदों में से केवल 1624 पद भरे गए हैं, जबकि 2042 पद रिक्त हैं। यही नहीं, मेडिकल ऑफिसर (स्पेशलिस्ट) के 2050 स्वीकृत पदों में भी भारी कमी बनी हुई है।

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55 फीसदी पद हैं खाली

इस चौंकाने वाले आंकड़े पर हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “जब 55 फीसदी तक पद खाली हैं तो आम जनता को गुणवत्तापूर्ण इलाज आखिर कैसे मिलेगा?” अदालत ने सरकार से पूछा कि इन पदों को भरने के लिए अब तक कितनी गंभीरता दिखाई गई, कितने विज्ञापन निकाले गए और नियुक्ति प्रक्रिया कहां तक पहुंची।

राज्य सरकार ने अपने बचाव में आम आदमी क्लीनिक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा डॉक्टर, विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट, हाउस सर्जन और इंपैनल विशेषज्ञों की सेवाओं का हवाला दिया, लेकिन अदालत इससे संतुष्ट नहीं हुई। खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि अस्थायी व्यवस्थाएं नियमित और स्थायी स्वास्थ्य प्रणाली का विकल्प नहीं हो सकतीं।

मालेरकोटला की स्थिति पर चिंता जताई

मालेरकोटला जिला अस्पताल में एमआरआई सीटी स्कैन नहीं होने पर अदालत ने विशेष चिंता जताई। चीफ जस्टिस ने कहा, “यह बेहद आश्चर्यजनक और झकझोरने वाली स्थिति है कि एक जिले के नागरिकों को ऐसी मूलभूत जांच सुविधाओं के लिए दूसरे जिलों का रुख करना पड़े।” अदालत ने पंजाब सरकार की “क्लस्टर प्रणाली” पर भी सवाल उठाए, जिसके तहत चार-पांच जिलों के लिए एक एमआरआई मशीन की व्यवस्था की गई है।

कोर्ट ने तीखा सवाल किया, “क्या राज्य यह मानकर चल रहा है कि हर मरीज लंबी दूरी तय कर सकता है? आखिर जिला अस्पताल जिला स्तर पर ही पूर्ण सुविधा क्यों नहीं दे सकते?”

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वेलफेयर स्टेट में स्वास्थ्य नागरिक का अधिकार

खंडपीठ ने कहा कि वेलफेयर स्टेट में स्वास्थ्य नागरिक का अधिकार है और राज्य की सर्वोच्च जिम्मेदारी भी। अदालत ने संकेत दिए कि यदि सरकार स्पष्ट नीति और समयबद्ध योजना पेश नहीं करती तो प्रत्येक जिले के अस्पताल में एमआरआई सीटी स्कैन और पर्याप्त आइसीयू सुविधा सुनिश्चित करने के लिए बाध्यकारी आदेश जारी किए जा सकते हैं।

साथ ही अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव स्तर पर जवाबदेही भी तय करने के संकेत दिए। अब पंजाब सरकार को यह बताना होगा कि राज्य के सभी 23 जिलों में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उसकी वास्तविक कार्ययोजना क्या है।

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