पंजाब की जेलों में भीड़ बेकाबू, अमृतसर जेल ने कैदी लेने से किया इंकार; संक्रमण का खतरा बढ़ा, हाई कोर्ट सख्त
पंजाब की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं। अमृतसर जेल ने नए कैदियों को लेने से इंकार किया ...और पढ़ें

अमृतसर केंद्रीय जेल।
HighLights
पंजाब जेलों में क्षमता से अधिक 37,000 कैदी बंद हैं।
अमृतसर सेंट्रल जेल ने नए कैदियों को लेने से मना किया।
हाई कोर्ट ने जेलों की बदहाली पर सरकार से विस्तृत जवाब मांगा।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब की जेलों में बेकाबू भीड़ अब सिस्टम पर सीधा दबाव बनाती नजर आ रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अमृतसर सेंट्रल जेल ने नए कैदियों को लेने से साफ मना कर दिया है। यह कदम अस्थायी राहत के तौर पर उठाया गया माना जा रहा है, लेकिन संकेत साफ हैं कि अन्य जेलें भी इसी राह पर चल सकती हैं।
ओवरक्राउडिंग के चलते जहां जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली प्रभावित हुई है, वहीं अंदर संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। प्रदेश की जेलों की कुल क्षमता करीब 26,000 कैदियों की है, जबकि वर्तमान में लगभग 37,000 कैदी बंद हैं। यानी क्षमता से कहीं अधिक कैदियों को रखने की मजबूरी ने बुनियादी ढांचे को चरमरा दिया है।
नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के कारण बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं, जिससे जेलों में कैदियों की संख्या अचानक बढ़ी और हालात नियंत्रण से बाहर होने लगे। कई जेलों में कैदियों की संख्या क्षमता के मुकाबले दोगुनी तक पहुंचने लगी है।
यह भी पढ़ें- शोषण पीड़िता की गर्भसमापन याचिका पर अदालत सख्त, मेडिकल बोर्ड करेगा अंतिम फैसला
स्वास्थ्य के मोर्चे पर स्थिति और गंभीर
2023 में हुई व्यापक जांच के दौरान 951 कैदी एचआईवी (एचआईवी) पॉजिटिव पाए गए थे, जबकि 4,846 कैदी हेपेटाइटिस बी और सी से संक्रमित मिले थे। इसके बाद 2024 में सामने आए सर्वे आंकड़ों ने चिंता और बढ़ा दी, जिनमें करीब 23 प्रतिशत कैदियों को हेपेटाइटिस सी (एचसीवी) से ग्रस्त पाया गया।
इससे पहले की एक रेट्रोस्पेक्टिव स्टडी में जेलों में एचआईवी की व्यापकता 10 प्रतिशत और एचसीवी की 31.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जो राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक है।
126 कैदी एसआईवी व एचसीवी ग्रस्त
जेलों के भीतर नशे की समस्या इस संकट को और गहरा कर रही है। साझा सुइयों और सिरिंज का इस्तेमाल संक्रमण फैलाने का सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया है। यही वजह है कि 126 कैदी ऐसे भी मिले हैं, जो एचआईवी और एचसीवी दोनों से एक साथ संक्रमित हैं। इसके अलावा गंदगी और भीड़ के चलते हेपेटाइटिस ए और ई तथा काला पीलिया जैसे रोगों के मामले भी सामने आ रहे हैं।
पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी के आंकड़ों के अनुसार, 2019-20 में जहां 4,131 नए एचआईवी मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 10,109 तक पहुंच गई। तीन साल में लगभग दोगुनी वृद्धि ने स्वास्थ्य तंत्र की चुनौतियों को उजागर कर दिया है।
यह भी पढ़ें- खेत में ट्रैक्टर बना मौत का कारण, फतेहगढ़ साहिब में खेत में काम कर रहा युवक कुचला गया; इलाज के दौरान दम तोड़ा
हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
इसी बीच 2024 में सामने आए आंकड़ों को आधार बनाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से जेलों में भीड़भाड़, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, मेडिकल स्टाफ की कमी, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं, नए कैदियों के मेडिकल परीक्षण और हिरासत में होने वाली अस्वाभाविक मौतों पर विस्तृत जवाब मांगा है।
जेलों में मेडिकल ऑफिसरों के पद खाली
सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मेडिकल ऑफिसर के 42 स्वीकृत पदों में से 36 भरे गए हैं, जबकि 6 पद खाली हैं। फार्मासिस्ट के 48 पदों में से 35 पद भरे हैं और 13 अभी भी रिक्त हैं। वहीं 42 अप्राकृतिक मौतों के मामलों का निपटारा संबंधित मानवाधिकार आयोगों द्वारा किया जा चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ओवरक्राउडिंग पर ठोस नियंत्रण नहीं किया जाता और जेलों में स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता नहीं दी जाती, तब तक यह संकट और गहराता जाएगा। फिलहाल, पंजाब की जेलें सुरक्षा के साथ-साथ एक बड़े स्वास्थ्य संकट का केंद्र बनती जा रही हैं, जहां सुधार की जरूरत अब बेहद जरूरी हो चुकी है।
