पंजाब में प्रिंसिपल बनने की राह 50 फीसदी अंक की शर्त से अटकी पदोन्नति, स्पीकर ने शिक्षा विभाग को लिखा पत्र
सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल पदोन्नति के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन में 50 प्रतिशत अंक की शर्त पर स्पीकर ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग से नियमों पर ...और पढ़ें

पंजाब विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां।
HighLights
स्पीकर संधवां ने 50% अंकों की शर्त पर सवाल उठाया।
अनुभवी लेक्चरर पदोन्नति से वंचित होने की आशंका।
शिक्षा विभाग से नियमों में संशोधन की अपील की।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल पद पर पदोन्नति के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन में 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता का मुद्दा उठाया है। उन्होंने स्कूल शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि इस शर्त के कारण बड़ी संख्या में अनुभवी लेक्चरर पदोन्नति से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने विभाग से इस मामले में उचित फैसला लेने और प्रभावित शिक्षकों को राहत देने का आग्रह किया है।
स्पीकर ने अपने पत्र में कहा है कि स्कूल शिक्षा विभाग ने सितंबर 2025 में जारी अधिसूचना के तहत प्रिंसिपल पदोन्नति के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य कर दिए हैं। लेकिन विभाग में कई ऐसे लेक्चरर हैं, जिन्होंने सेवा के दौरान एक से अधिक पोस्ट ग्रेजुएट डिग्रियां हासिल की हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में पात्रता तय करते समय उम्मीदवार की किसी भी पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री में प्राप्त सर्वाधिक अंकों को आधार बनाया जाए, ताकि योग्य शिक्षक केवल तकनीकी कारणों से पदोन्नति से वंचित न रहें।
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पदोन्नति नियम बदलने पर बढ़ा शिक्षकों का विरोध
इस मुद्दे को लेकर बठिंडा शहरी से विधायक जगरूप सिंह गिल भी सरकार के समक्ष अपनी बात रख चुके हैं। उन्होंने मुख्य सचिव (स्कूल शिक्षा) को लिखे पत्र में कहा कि सितंबर 2025 की अधिसूचना के बाद कई योग्य लेक्चररों के लिए प्रिंसिपल पदोन्नति का रास्ता बंद हो गया है। उन्होंने विभाग से इस मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की है।
वहीं, प्रभावित लेक्चररों ने भी स्कूल शिक्षा मंत्री को ज्ञापन देकर नियमों में संशोधन की मांग की है। उनका कहना है कि 2004 और 2018 के सेवा नियमों में पोस्ट ग्रेजुएशन में 50 प्रतिशत अंक की कोई शर्त नहीं थी और पदोन्नति केवल वरिष्ठता के आधार पर होती थी। वर्ष 2025 में नियम बदलने के कारण लंबे समय से सेवा दे रहे सैकड़ों लेक्चरर, मुख्याध्यापक और वोकेशनल लेक्चरर प्रभावित हो रहे हैं।
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नियमों में संशोधन से खुलेगी पदोन्नति राह
शिक्षकों ने मांग की है कि यदि किसी कर्मचारी के पास एक से अधिक पोस्ट ग्रेजुएट डिग्रियां हैं तो किसी भी डिग्री में प्राप्त सर्वाधिक अंक को पात्रता के लिए मान्य किया जाए। उनका कहना है कि व्यावसायिक (वोकेशनल) लेक्चररों के मामले में इसी प्रकार की व्यवस्था लागू है, इसलिए सामान्य लेक्चररों को भी समान लाभ मिलना चाहिए। यदि यह संभव नहीं है तो 50 प्रतिशत अंकों की शर्त समाप्त कर पहले की तरह वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दी जाए।
अब इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग के निर्णय पर शिक्षकों की नजरें टिकी हुई हैं। यदि सरकार नियमों में संशोधन करती है तो बड़ी संख्या में लेक्चररों को प्रिंसिपल पद पर पदोन्नति का रास्ता खुल सकता है।
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