मोहाली के 2.112 एकड़ भूखंड पर जांच तेज, ई-नीलामी के बाद शर्तें बदलने से उठे गंभीर सवाल
मोहाली के 33 करोड़ रुपये के भूखंड आवंटन में ई-नीलामी के बाद बदली शर्तों की जांच होगी। कमेटी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर भविष्य के वित्तीय हित सुरक्षित करेगी।

ये AI जनरेटेड इमेज है।
HighLights
मोहाली के 2.112 एकड़ भूखंड आवंटन में अनियमितताओं की जांच।
ई-नीलामी के बाद शर्तों में बदलाव से उठे गंभीर सवाल।
पीएसआइईसी बोर्ड ने तथ्यात्मक जांच कमेटी गठित की।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। मोहाली के फोकल प्वाइंट में 2.112 एकड़ व्यावसायिक भूखंड के आवंटन को लेकर पंजाब स्माल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कारपोरेशन में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय की 4 से 6 अगस्त तक हुई कार्रवाई के बाद निगम के निदेशक मंडल ने मामले की तथ्यात्मक जांच के लिए अन्य विभागों के अधिकारियों की कमेटी गठित करने का निर्णय लिया है।
खास बात यह है कि बैठक में भूखंड आवंटन से जुड़े अधिकारियों को चर्चा से अलग रखा गया। पीएसआइईसी बोर्ड की 14 अगस्त की बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार, जांच में यह सामने आया कि भूखंड को ई-नीलामी में लगाने से पहले न तो उचित साइट विजिट की गई और न ही व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की गई।
भूखंड को 'जहां है, जैसा है' के आधार पर नीलाम किया गया था। मौके पर भवन का कुछ हिस्सा, डीजी सेट, पंप चैंबर और ट्यूबवेल मौजूद थे।
नीलामी के बाद बदली गईं शर्तें
बोर्ड के समक्ष यह भी सामने आया कि आवंटन पत्र की कुछ शर्तों में बाद में बदलाव किया गया। कार्यवृत्त में दर्ज है कि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना आवंटन पत्र की कुछ शर्तें बदली गईं। इन बदलावों के कारण मौके पर मौजूद ढांचे और अन्य अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी पीएसआइईसी पर आ गई।
मामला वर्ष 2020 का है। पीएसआइईसी ने पटियाला की कंपनी आइकानिक स्पेस क्रिएटर्स को 2.112 एकड़ भूखंड 33.33 करोड़ रुपये में आवंटित किया था। ईडी ने अपनी कार्रवाई के दौरान आरोप लगाया था कि नीलामी के समय निर्धारित नियमों की तुलना में बाद में शर्तों में बदलाव कर आवंटी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
15 साल पुराने आवंटन से भी कम कीमत
इस मामले में भूखंड की कीमत भी सवालों के घेरे में रही। वर्ष 2020 में यह साइट 32,600 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से आवंटित हुई, जबकि पीएसआइईसी के अधिकारियों के अनुसार आसपास वर्ष 2005 में एक भूखंड 60,000 रुपये प्रति वर्ग गज में आवंटित किया गया था। ऐसे में 15 वर्ष बाद व्यावसायिक साइट की कम दर पर नीलामी को लेकर सवाल उठे।
विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने वर्ष 2023 में आवंटन रद कर दिया था। फिलहाल मामला मध्यस्थता में है और आवंटी ने अब तक करीब 4.99 करोड़ रुपये ही जमा कराए हैं।
भविष्य में वित्तीय हित सुरक्षित करने पर जोर
पीएसआइईसी के चेयरपर्सन दलवीर सिंह ने कहा कि भूखंड आवंटन में अनियमितताएं सामने आई हैं और बाद में शर्तों में बदलाव कर आवंटी को अनुचित लाभ देने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि ई-नीलामी होने के बावजूद कई विसंगतियां थीं।
इसलिए तथ्यात्मक जांच कमेटी गठित करने का फैसला लिया गया है। कमेटी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के साथ भविष्य में निगम के वित्तीय हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय भी सुझाएगी।
यह भी पढ़ें- जालंधर में 600 करोड़ का सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट मंजूर, कंपनी घर-घर से कूड़ा उठाएगी और बनाएगी 'खाद'
