आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी भाषा पर विवाद, पूर्व सांसद त्रिलोचन सिंह ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखा पत्र
र्व सांसद त्रिलोचन सिंह ने पंजाब के सेना स्कूलों में पंजाबी को अतिरिक्त विषय बनाने पर विरोध जताया है। उन्होंने रक्षा मंत्री से हस्तक्षेप कर पंजाबी को ...और पढ़ें

पूर्व सांसद तरलोचन सिंह।
HighLights
पूर्व सांसद त्रिलोचन सिंह ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा।
आर्मी स्कूलों में पंजाबी को अनिवार्य विषय बनाने की मांग।
पंजाबी भाषा सांस्कृतिक विरासत और सैनिक परंपराओं से जुड़ी है।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पद्म भूषण व पूर्व सांसद त्रिलोचन सिंह ने पंजाब के आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी भाषा की स्थिति को लेकर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा है। उन्होंने आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसायटी की ओर से जारी नए आदेशों पर चिंता जताते हुए कहा है कि पंजाब के आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी को अनिवार्य विषय की बजाय अतिरिक्त विषय के रूप में पढ़ाने का फैसला विद्यार्थियों और समाज दोनों के हित में नहीं है।
उन्होंने रक्षा मंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर पहले की व्यवस्था बहाल करने की मांग की है। पूर्व सांसद त्रिलोचन सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि रक्षा मंत्री पहले भी इस विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए हस्तक्षेप कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि विशेषकर उत्तर भारत के आर्मी पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए पंजाबी भाषा का ज्ञान जरूरी है, क्योंकि यह भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि वीरता, बलिदान और सैनिक परंपराओं से जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि पंजाबी भाषा में मौजूद मार्शल परंपराएं और गुरु साहिबानों की वाणी युवाओं को सेना में शामिल होने तथा देश सेवा के लिए प्रेरित करती हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी की रचनाएं और उनके संदेश सैनिकों के भीतर साहस और आत्मविश्वास पैदा करने का कार्य करते हैं।
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यही कारण है कि देश जब भी युद्ध या तनावपूर्ण परिस्थितियों से गुजरा है, तब ऑल इंडिया रेडियो और विभिन्न टीवी चैनलों पर गुरु ग्रंथ साहिब और दशम ग्रंथ के शबद प्रसारित किए जाते रहे हैं, ताकि सैनिकों का मनोबल ऊंचा रखा जा सके।
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सरकार के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया
त्रिलोचन सिंह ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसायटी ने पंजाब स्थित आर्मी पब्लिक स्कूलों के प्रबंधन को नए निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत पंजाबी को अब अनिवार्य विषय की जगह अतिरिक्त विषय के रूप में पढ़ाने की बात कही गई है।
उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पंजाब जैसे राज्य में पंजाबी को अनिवार्य विषय से हटाना विद्यार्थियों को अपनी भाषा और सांस्कृतिक विरासत से दूर करने जैसा होगा।
उन्होंने कहा कि पंजाब और भारतीय सेना का रिश्ता ऐतिहासिक रहा है। देश की सुरक्षा में पंजाब के सैनिकों ने हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है। बड़ी संख्या में पंजाब के युवा सेना में भर्ती होकर देश सेवा करते हैं। ऐसे में सेना से जुड़े शिक्षण संस्थानों में पंजाबी भाषा को कमजोर करना उचित नहीं माना जा सकता।
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आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा नकारात्मक असर
पूर्व सांसद ने अपने पत्र में यह भी कहा कि यदि आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी शिक्षण को नजरअंदाज किया गया तो इसका नकारात्मक असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। विद्यार्थियों का अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ाव कमजोर होगा। उन्होंने रक्षा मंत्री से आग्रह किया कि पुराने सिस्टम को जारी रखते हुए पंजाब के आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी को अनिवार्य भाषा के रूप में बनाए रखने के निर्देश दिए जाएं।
त्रिलोचन सिंह ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस विषय को केवल भाषा के मुद्दे के रूप में नहीं बल्कि देश की सांस्कृतिक और सैनिक विरासत से जुड़े विषय के तौर पर देखेगी और सकारात्मक निर्णय लेगी।
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