नशा मुक्ति के लिए पंजाब सरकार का बड़ा कदम, गंभीर ओपिओइड मरीजों के लिए शुरू की मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी
पंजाब सरकार ने गंभीर ओपिओइड नशे के इलाज के लिए मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी (एमएमटी) पर ध्यान केंद्रित किया है। ...और पढ़ें

सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में शुरू हुए समर्पित मेथाडोन क्लीनिक (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
गंभीर ओपिओइड नशे के लिए मेथाडोन थेरेपी शुरू।
लुधियाना सहित कई जिलों में समर्पित क्लीनिक खुले।
पारंपरिक उपचार से अप्रभावित मरीजों को मिलेगा लाभ।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। नशे के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए पंजाब सरकार अब गंभीर रूप से ओपिओइड नशे के आदी लोगों के इलाज में मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी (एमएमटी) पर विशेष जोर दे रही है।
अब तक राज्य के नशा मुक्ति केंद्रों में मुख्य रूप से बुप्रेनार्फिन-नालोक्सोन दवा के जरिए उपचार किया जाता था, लेकिन जिन मरीजों पर इसका अपेक्षित असर नहीं हो रहा या जिनकी निर्भरता अधिक गंभीर है, उनके लिए मेथाडोन को विकल्प के रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है।
हाल ही में लुधियाना के सिविल अस्पताल में राज्य के पहले समर्पित मेथाडोन क्लीनिक की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही जालंधर, गुरदासपुर तथा पटियाला, मोहाली और फरीदकोट के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी ऐसे क्लीनिक शुरू किए गए हैं। पहले यह सुविधा सामान्य नशा मुक्ति सेवाओं का हिस्सा थी, लेकिन अब इसके लिए अलग क्लीनिक स्थापित किए गए हैं।
मेथाडोन एक लंबे समय तक असर करने वाली दवा
मेथाडोन एक लंबे समय तक असर करने वाली दवा है, जिसे चिकित्सकीय निगरानी में दिया जाता है। इसका उद्देश्य मरीज में नशे की तीव्र इच्छा और वापसी के दौरान होने वाली तकलीफ को कम करना है, ताकि वह सामान्य जीवन की ओर लौट सके।
इसके साथ परामर्श, मनोवैज्ञानिक सहयोग और नियमित चिकित्सकीय निगरानी भी की जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में लगभग 450 बाह्य ओपिओइड उपचार केंद्र पहले से संचालित हैं, जहां बुप्रेनार्फिन-नालोक्सोन पहली पसंद की दवा है। हालांकि कुछ मरीजों में यह पर्याप्त प्रभावी नहीं होती।
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ऐसे मामलों में मेथाडोन बेहतर परिणाम दे सकती है। फिलहाल यह दवा केवल निर्धारित क्लीनिकों में डाक्टरों की निगरानी में ही दी जाएगी और शुरुआती चरण में मरीजों को रोजाना क्लीनिक आना होगा।
एक लाख से अधिक लोग उपचार के लिए पंजीकृत
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पंजाब के सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में एक लाख से अधिक लोग उपचार के लिए पंजीकृत हैं। वहीं राज्य सरकार पहली बार घर-घर सर्वे के जरिए नशे की वास्तविक स्थिति का आकलन भी कर रही है, ताकि भविष्य की रणनीति वैज्ञानिक आधार पर तैयार की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेथाडोन किसी अन्य उपचार का विकल्प नहीं, बल्कि गंभीर मामलों के लिए अतिरिक्त चिकित्सकीय साधन है। इससे उन मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से नशे की गिरफ्त में हैं और पारंपरिक उपचार से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री डा बलबीर सिंह ने इससे मरीजों का प्रचार हो रहा है जिसका अच्छा रिस्पांस मिल रहा है और इसे अन्य जिलों में भी क्लीनिकों में शुरू किया जाएगा ताकि मरीज का उपचार मिल सके।