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भाजपा और AAP के एजेंटों ने लगाई मुहर! सहमति के बाद मोहाली से ‘शिफ्टेड’ हुई चड्ढा की वोट

Published: Fri, 04 Sep 2026 07:00 AM (IST)

राघव चड्ढा की मोहाली की वोट ड्राफ्ट सूची में स्थायी रूप से स्थानांतरित दर्ज हुई। भाजपा और आप के बूथ एजेंटों की सहमति दस्तावेजों में बताई गई है।

राज्य सभा सांसद राघव चड्‌ढा।

राज्य सभा सांसद राघव चड्‌ढा।

HighLights

  1. मोहाली में राघव चड्ढा की वोट 'शिफ्टेड' दर्ज हुई।

  2. भाजपा और आप के बीएलए ने सहमति दी थी।

  3. चड्ढा ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।

रोहित कुमार, चंडीगढ़। राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा की मोहाली में पंजीकृत वोट को ‘परमानेंटली शिफ्टेड’ दर्ज करने की प्रक्रिया में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आम आदमी पार्टी,दोनों के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) की भी सहमति दर्ज है। यह सहमति तब ली जाती है जब संबंधित इलाके के बीएलओ द्वारा मतदाता के घर दस्तक दिए जाने के बावजूद भी मतदाता द्वारा एन्यूमेरेशन फार्म भरा या हस्ताक्षरित लौटाया नहीं जाता।

पता चला है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान संबंधित दस्तावेज पर राजनीतिक दलों के बूथ एजेंटों की सहमति के बाद ही संबंधित वोट को एएसएसडी सूची में डाला जाता है। राघव चड्ढा के केस में यह ‘शिफ्टेड’ दर्ज किया गया।

यही अब इस पूरे विवाद का अहम बिंदु बन गया है। राज्यसभा सदस्य चड्ढा ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है, जबकि आम आदमी पार्टी ने कहा है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधीन है और पंजाब सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है।

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जानें क्या है नियम

चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार किसी व्यक्ति का मतदाता पंजीकरण उसी स्थान पर होना चाहिए जहां वह सामान्य रूप से निवास करता है। विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के पते और निवास की स्थिति का सत्यापन किया जाता है। सत्यापन के आधार पर किसी मतदाता को स्थानांतरित पाया जाता है तो संबंधित स्थिति ड्राफ्ट मतदाता सूची में दर्ज की जा सकती है।

एसआईआर के दिशा-निर्देशों में सांसदों और विधायकों सहित कुछ विशेष श्रेणियों के लोगों के लिए अलग प्रावधान भी हैं। पैराग्राफ 4(डी) के तहत ऐसी श्रेणी के व्यक्ति का नाम पहले से चुनावी डाटाबेस में चिन्हित होने पर केवल नया गणना फार्म जमा नहीं होने के आधार पर उसका नाम ड्राफ्ट सूची से हटाया नहीं जाना चाहिए। ऐसे मामलों को दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के लिए रखा जाता है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि विशेष श्रेणी के मतदाताओं को सत्यापन से पूरी तरह छूट है। संबंधित दस्तावेज दावे और आपत्तियों की अवधि में लिए जा सकते हैं। इसलिए ड्राफ्ट सूची में ‘शिफ्टेड’ लिखा होना वोट खत्म होने का अंतिम निर्णय नहीं है।

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‘वोट काटी नहीं गई, सत्यापन में शिफ्टेड दर्ज हुई’

राज्य के चुनाव अधिकारी कार्यालय में उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक चड्ढा की वोट किसी अधिकारी ने मनमाने ढंग से नहीं काटी है। एसआईआर के दौरान सत्यापन प्रक्रिया में उनकी वोट को ‘परमानेंटली शिफ्टेड’ के रूप में दर्ज किया गया। अधिकारियों के अनुसार इस प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज पर राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। इनमें भाजपा और आम आदमी पार्टी, दोनों के बीएलए भी शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार अभी यह ड्राफ्ट मतदाता सूची है। अंतिम सूची जारी होने से पहले संबंधित मतदाता को दावा और आपत्ति दाखिल करने का अवसर मिलता है। आपत्ति के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के बाद अंतिम स्थिति तय होगी और अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में अंतिम सूची प्रकाशित होने तक संबंधित मतदाता के पास अपना नाम अंतिम मतदाता सूचि में प्रकाशित कराने के कई मौके मौजूद हैं।

चड्ढा बोले- राजनीतिक प्रतिशोध

राघव चड्ढा ने गुरुवार को इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सदस्य हैं और उनका वोटर आइडी मोहाली में पंजीकृत है। इसके बावजूद ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनका नाम ‘शिफ्टेड’ के रूप में दर्ज किया गया। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया। चड्ढा ने कहा कि राहत की बात यह है कि अभी अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित नहीं हुई है और वह एसआईआर के तहत उपलब्ध प्रक्रिया का इस्तेमाल कर आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।

आप बोली- पंजाब सरकार का कोई रोल नहीं

आम आदमी पार्टी ने चड्ढा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा आप नेता व मंत्री हरपाल सिंह चीमा व अमन अरोड़ा ने कहा कि एसआईआर चुनाव आयोग की प्रक्रिया है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या स्थानांतरित करने का फैसला पंजाब सरकार नहीं करती। आप ने आरोप लगाया कि चड्ढा दिल्ली के राजिंदर नगर में अपना मतदाता पंजीकरण बैकडेट प्रक्रिया के जरिये कराने का प्रयास कर रहे हैं।

पार्टी ने कहा कि यदि ऐसा कोई प्रयास हुआ है तो इसकी जांच होनी चाहिए और पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। चीमा ने कहा कि पहले राघव चड्ढा खुद बयान देते रहे हैं कि एसआईआर प्रक्रिया के जरिए लाखों लोगों को वोट के अधिकार से वंचित किया गया है और अब चुनाव आयोग को छोड़कर राज्य सरकार का कसूर बताने लग गए हैं।

राघव चड्ढा की राज्यसभा सदस्यता पर सवाल

अमन अरोड़ा ने कहा कि राज्य में हजारों की संख्या में उन प्रवासियों के वोट कटे हैं जो कुछ समय के लिए ही पंजाब में थे, राघव चड्ढा भी उन्हीं में से एक हैं। ध्यान दें कि यह मामला इसलिए अहम है कि राघव चड्ढा अप्रैल 2026 में आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।

अब उनकी मोहाली की वोट ‘शिफ्टेड’ दर्ज होने के कारण उनके राज्यसभा के लिए हुए चयन की एक मूल एवं अहम योग्यता पर सवाल खड़ा हो रहा है जोकि देश में मतदाता के तौर पर दर्ज होने से संबंधित है। राज्यसभा के चुनाव के समय राघव चड्ढा दिल्ली के राजिंदर नगर इलाके में मतदाता के तौर पर दर्ज थे, जिसे उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले पंजाब के साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) में शिफ्ट करवा लिया था।

अब पंजाब की ड्राफ्ट सूची में उनका नाम शामिल नहीं होने और दिल्ली के राजिंदर नगर में भी नहीं होने के कारण इसी मूल व अहम योग्यता की कमी पैदा हो सकती है, जिससे उनका राज्यसभा चुनाव चैलेंज हो सकता है।

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