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पंजाब कांग्रेस में थमेगी कलह? रक्खड़ पुन्निया मेले में चन्नी गुट ने किया शक्ति प्रदर्शन; वड़िंग खेमा रहा दूर

By Dr. Sumit Singh SheoranEdited By: Anuj Sharma
Published: Sat, 29 Aug 2026 02:54 PM (IST)

रक्खड़ पुन्निया मेले में कांग्रेस की गुटबाजी फिर सामने आई। चन्नी खेमे के कई नेता जुटे, जबकि वड़िंग समर्थक दूर रहे। राहुल गांधी के दौरे से पहले चुनौती बढ़ी।

रक्खड़ पुन्निया मेले में मौजूद चरणजीत सिंह चन्नी व अन्य नेता।

रक्खड़ पुन्निया मेले में मौजूद चरणजीत सिंह चन्नी व अन्य नेता।

HighLights

  1. रक्खड़ पुन्नया मेले में कांग्रेस की गुटबाजी दिखी।

  2. चन्नी गुट ने शक्ति प्रदर्शन किया, वड़िंग खेमा अनुपस्थित।

  3. राहुल गांधी के दौरे से पहले गुटों को एकजुट करने की चुनौती।

डाॅ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान खत्म होने के दावों के बीच बाबा बकाला में रक्खड़ पुन्निया मेले के अवसर पर पार्टी की गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई। शुक्रवार को कांग्रेस की राजनीतिक कांफ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री एवं जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी खेमे के नेताओं की मजबूत मौजूदगी रही, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और उनके समर्थक प्रमुख नेता कार्यक्रम से दूर रहे।

इससे यह संकेत गया कि दिल्ली में एकजुटता का संदेश देने की कोशिशों के बावजूद पंजाब में दोनों खेमों के बीच दूरी अभी कम नहीं हुई है। रक्खड़ पुन्नया का मंच इस बार कांग्रेस के लिए महज परंपरागत राजनीतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के भीतर शक्ति प्रदर्शन भी बन गया।

चन्नी के साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक राणा गुरजीत सिंह और पूर्व मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा समेत कई नेता नजर आए। कार्यक्रम में जुटी भीड़ और नेताओं की मौजूदगी  चन्नी खेमे के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर दिखा। खास बात यह रही कि कार्यक्रम के आयोजन को लेकर प्रदेश नेतृत्व की भूमिका का दावा होने के बावजूद मंच पर वड़िंग खेमे की अनुपस्थिति ने पार्टी की अंदरूनी स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए।

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हाईकमान मतभेद खत्म करने में जुटी

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब कांग्रेस हाईकमान पंजाब में संगठनात्मक मतभेद खत्म करने की कोशिश कर रहा है। प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने हाल ही में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात कर पंजाब के प्रस्तावित दौरे और पार्टी की चुनावी तैयारियों पर चर्चा की है। राहुल गांधी का पंजाब दौरा सितंबर के दूसरे सप्ताह में प्रस्तावित है। हालांकि अंतिम तारीख अगले दो तीन दिन में जारी होने की उम्मीद है।

राहुल के दौरे से पहले कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों गुटों को एक मंच पर लाने की है। हाईकमान पहले ही वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला कर चुका है, लेकिन चन्नी खेमे की गतिविधियां संकेत दे रही हैं कि नेतृत्व का यह फैसला सभी को स्वीकार्य नहीं हुआ है।

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पंजाब कांग्रेस में खेमेबाजी खत्म करने की चुनौती

इससे पहले भी प्रदेश प्रभारी के चंडीगढ़ दौरे के दौरान चन्नी ने विधायक राणा गुरजीत सिंह के आवास पर बड़ी संख्या में मौजूदा और पूर्व विधायकों, सांसदों तथा वरिष्ठ नेताओं को जुटाकर एक तरह से शक्ति प्रदर्शन किया था। दूसरी ओर, बाबा बकाला में भाजपा, आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल ने भी अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए चुनावी ताकत दिखाई।

भाजपा के मंच पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी ने एकजुटता का संदेश दिया है। अब सभी की निगाहें राहुल गांधी के पंजाब दौरे पर हैं। उनके सामने जहां 2027 की चुनावी रणनीति को धार देने की चुनौती होगी, वहीं यह भी देखना अहम होगा कि क्या वह वड़िंग और चन्नी खेमे को एक मंच पर लाकर लंबे समय से चली आ रही खेमेबाजी पर विराम लगा पाते हैं।

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