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ZEE5 से हटने के बाद पंजाब के गांवों तक पहुंची 'सतलुज', बड़ी स्क्रीनों पर दिखाई जा रही फिल्म; ग्रामीणों की जुटी भीड़

By Rohit KumarEdited By: Prince Sharma
Published: Fri, 10 Jul 2026 09:53 AM (IST)

अभिनेता दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को जी5 से हटाए जाने के बाद अब पंजाब के गांवों में सामूहिक स्क्रीनिंग की जा रही है।

ZEE5 से हटने के बाद पंजाब के गांवों तक पहुंची 'सतलुज' (सोशल मीडिया)

ZEE5 से हटने के बाद पंजाब के गांवों तक पहुंची 'सतलुज' (सोशल मीडिया)


HighLights

  1. फिल्म 'सतलुज' जी5 से हटने के बाद गांवों में प्रदर्शित

  2. गुरुद्वारों, सामुदायिक स्थलों पर हो रही सामूहिक स्क्रीनिंग

  3. जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है यह फिल्म

रोहित कुमार, चंडीगढ़। अभिनेता दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 से हटाए जाने के बाद पंजाब के गांवों में इसे लेकर अलग ही माहौल बन गया है। अब फिल्म की स्क्रीनिंग गुरुद्वारों, गांवों के सामुदायिक स्थलों और खुले मैदानों में की जा रही है। कई गांवों में गुरुद्वारों के लाउडस्पीकर से शाम के समय लोगों को फिल्म देखने के लिए आमंत्रित किया जाता है। घोषणा के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों सहित स्क्रीनिंग स्थल पर पहुंच रहे हैं।

मोगा, संगरूर, पटियाला, अमृतसर, लुधियाना, गुरदासपुर, बरनाला, बठिंडा, होशियारपुर और राजपुरा सहित कई जिलों के गांव इस अभियान से जुड़ चुके हैं। कहीं गुरुद्वारा प्रबंधन ने व्यवस्था संभाली है तो कहीं स्पोर्ट्स क्लब, सामाजिक संस्थाएं और स्थानीय स्वयंसेवक एलईडी स्क्रीन, प्रोजेक्टर, साउंड सिस्टम और बैठने की व्यवस्था कर रहे हैं। कई आयोजनों का खर्च विदेशों में बसे पंजाबी उठा रहे हैं, ताकि फिल्म अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।

बच्चों से लेकर बुजुर्ग भी मौजूद

स्क्रीनिंग के दौरान गांव का माहौल किसी सामाजिक आयोजन जैसा दिखाई देता है। बच्चे आगे बैठकर फिल्म देखते हैं, जबकि महिलाएं और बुजुर्ग अलग-अलग समूहों में मौजूद रहते हैं। कई स्थानों पर स्वयंसेवक लोगों को ठंडा पेय और जलपान भी उपलब्ध करा रहे हैं। शाम छह बजे के बाद शुरू होने वाली इन स्क्रीनिंग में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि सामूहिक स्क्रीनिंग की शुरुआत राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के एक गांव से हुई थी। इसके बाद यह सिलसिला तेजी से पंजाब के गांवों तक फैल गया। सोशल मीडिया पर रोजाना नई स्क्रीनिंग की जानकारी साझा की जा रही है। एलईडी वॉल और साउंड सिस्टम उपलब्ध कराने वाले कारोबारियों का कहना है कि लगातार बुकिंग बढ़ रही है और कई दिनों तक उनके सभी उपकरण पहले से बुक हो चुके हैं।

जसवंत सिंह खालड़ा पर आधारित है फिल्म

फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। खालड़ा ने पंजाब में आतंकवाद के दौर के दौरान कथित गैरकानूनी अंतिम संस्कार और लापता लोगों से जुड़े मामलों का दस्तावेजीकरण किया था। सितंबर 1995 में उनका अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। बाद में इस मामले में पंजाब पुलिस के छह कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया।

निर्देशक हनी त्रेहान की इस फिल्म का निर्माण कई वर्ष पहले पूरा हो गया था, लेकिन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के साथ लंबे विवाद के कारण इसकी रिलीज करीब चार वर्ष तक अटकी रही। शुरुआत में फिल्म का नाम 'पंजाब 95' रखा गया था, जिसे बाद में बदलकर 'सतलुज' कर दिया गया।

जी-5 से हटाई गई मूवी

हाल ही में फिल्म जी5 पर रिलीज हुई, लेकिन दो दिन बाद ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। इसके बाद फिल्म को लेकर बहस तेज हो गई। सिख संगठनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, विभिन्न राजनीतिक दलों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने इस फैसले पर सवाल उठाए। पंजाब भाजपा के ज्ञापन के बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है, जबकि सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत भी पूरे प्रकरण की समीक्षा की जा रही है।

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