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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 10, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    खालिस्तानी के समर्थन में भड़काऊ नारे लिखने के आरोपी को झटका, जमानत याचिका खारिज, HC ने की सख्त टिप्पणी

    Updated: Mon, 10 Feb 2025 11:41 PM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने खालिस्तानी आंदोलन के समर्थन में भड़काऊ नारे लिखने और इंटरनेट मीडिया पर भड़काऊ वीडियो प्रसारित करने के आरोपी व्यक्ति को ...और पढ़ें

    खालिस्तानी समर्थक को हाईकोर्ट ने नहीं दी जमानत। सांकेतिक फोटो
    खालिस्तानी समर्थक को हाईकोर्ट ने नहीं दी जमानत। सांकेतिक फोटो

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने दीवारों पर खालिस्तानी आंदोलन के समर्थन में भड़काऊ नारे लिखने व इंटरनेट मीडिया पर भड़काऊ वीडियो प्रसारित करने के आरोपी व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि खालिस्तानी आंदोलन का पुनर्जीवित होना देश की संप्रभुता के लिए खतरा है।

    जालंधर निवासी रमन ने याचिका दाखिल करते हुए जमानत की मांग की थी। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता को 7 सितंबर 2022 में गिरफ्तार किया गया था, चालान 12 मई 2023 को पेश किया गया और 14 अगस्त 2024 को आरोप तय किए गए थे। काफी समय बीत जाने के बावजूद अभी तक ट्रायल पूरा नहीं हुआ है। अभियोजन पक्ष के किसी भी गवाह से आज तक पूछताछ नहीं की गई है।

    व्यवस्था भंग होने की आशंका

    सरकारी वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा भड़काऊ व राष्ट्र-विरोधी सामग्री वाला एक वीडियो प्रसारित किया गया था। इस वीडियो से पंजाब में कानून व्यवस्था के भंग होने की आशंका बढ़ गई थी।

    कोर्ट ने कहा कि खालिस्तानी आंदोलन का समर्थन करने वाले नारे लिखकर व इंटरनेट मीडिया पर भड़काऊ वीडियो प्रसारित करके सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप हैं।

    यह अपराध नहीं, बल्कि हिंसा को भी बढ़ावा देता है

    यदि ये कृत्य सिद्ध हो जाते हैं तो ये न केवल आपराधिक हैं बल्कि हिंसा भड़काने, सांप्रदायिक कलह को बढ़ावा देने और राज्य के सामाजिक ताने-बाने को अस्थिर करने की क्षमता रखते हैं। याचिकाकर्ता पंजाब व हिमाचल प्रदेश राज्य में कई एफआइआर में इसी तरह के आरोपों का सामना कर रहा है।

    इसमें कोई संदेह नहीं है कि मुकदमे के समापन में कुछ देरी हुई है परंतु यह याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोपों की गंभीरता को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

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    वहीं, दूसरी तरफ अवैध रूप से रह रहे लोगों को निर्वासित करने की अमेरिकी मुहिम से भारत में उन अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है जिनके बच्च्चे राजनीतिक शरण के बहाने अमेरिका में बसे हुए हैं। इनमें से कई के केस वहां की अदालतों में चल रहे हैं जहां उन्होंने स्वयं को खालिस्तान समर्थक होने के कारण पीड़ित बताते हुए चरमपंथी नेताओं के पत्र लगाए हुए हैं।

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