खर्राटों को न समझें मामूली समस्या, समय पर इलाज से दिल, डायबिटीज और स्ट्रोक जैसी बीमारियों से बचाव संभव
खर्राटों को मामूली न समझें, क्योंकि यह स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है, जिससे दिल, डायबिटीज और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। विश्व नींद द ...और पढ़ें

आप या परिवार का कोई सदस्य सोते समय खर्राटे लेता है तो नजरअंदाज न करें।
HighLights
खर्राटे स्लीप एपनिया का संकेत।
गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा।
पीजीआई ने स्लीप एपनिया जागरूकता पर जोर दिया।
मोहित पांडेय, चंडीगढ़। अगर आप या परिवार का कोई सदस्य सोते समय खर्राटे लेता है तो नजरअंदाज न करें। यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। समय पर पहचान कर इलाज से दिल, डायबिटीज और स्ट्रोक जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है।
12 मार्च मनाए जाने वाले विश्व नींद दिवस पर पीजीआई के विशेषज्ञों ने स्लीप एपनिया जैसी बीमारी के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि भारत में बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में इसका पता ही नहीं चल पाता।
डाक्टरों के अनुसार अवरोधक स्लीप एपनिया एक ऐसी नींद से जुड़ी बीमारी है, जिसमें सोते समय सांस लेने का रास्ता बार-बार बंद हो जाता है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और नींद बार-बार टूटती रहती है।
अनुमान है कि दुनिया भर में करीब एक अरब लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। वहीं, भारत में लगभग 9 से 13 प्रतिशत वयस्कों में मध्यम से गंभीर स्लीप एपनिया की समस्या हो सकती है, यानी देश में करीब 10 करोड़ से अधिक लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं।
इस संबंध में पीजीआई के स्लीप लैब प्रभारी कान-नाक-गला (ईएनटी) विभाग डाॅक्टर संदीप बंसल ने कहा कि भारत में उच्च रक्तचाप, मधुमेह और दिल की बीमारियों से लड़ाई तब तक पूरी तरह सफल नहीं हो सकती, जब तक स्लीप एपनिया जैसी छिपी हुई बीमारी पर ध्यान नहीं दिया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि तेज खर्राटे आना, दिन में ज्यादा नींद आना, सुबह सिरदर्द रहना, सोते समय सांस रुकना या रात में अचानक घुटन महसूस होना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डाॅक्टर से जांच करानी चाहिए।
ईएनटी विभाग की विभागध्यक्ष जयमंती बक्शी ने कहा कि लोगों के साथ-साथ डाॅक्टरों में भी नींद से जुड़ी बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। समय पर पहचान और सही इलाज से मरीज की सेहत और जीवन की गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार जीवनशैली में सुधार, वजन कम करना, सीपीएपी मशीन, दंत उपकरण और जरूरत पड़ने पर शल्य चिकित्सा जैसे आधुनिक उपचारों से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
पीजीआइ में विश्व नींद दिवस पर आयोजित कार्यक्रम की थीम अच्छी नींद, बेहतर जीवन रखी गई है, जिसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि अच्छी नींद बेहतर सेहत के लिए बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्लीप एपनिया की समय रहते पहचान कर ली जाए तो दिल और मेटाबालिक बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है और देश को आने वाले समय में गैर-संचारी बीमारियों के बढ़ते बोझ से बचाया जा सकता है।
स्लीप एपनिया आखिर है क्या?
स्लीप एपनिया एक नींद से जुड़ा डिसऑर्डर है। इसमें सोते समय व्यक्ति की सांस कुछ पलों के लिए रुक जाती है। यह रुकावट कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनटों तक की हो सकती है। इस कारण नींद की गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह हार्ट, ब्रेन और शरीर के अन्य अंगों पर बुरा असर डाल सकता है।