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    आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अब पंजाब सरकार चलाएगी बड़ा अभियान; सीएम मान ने किया ऐलान

    Updated: Fri, 22 May 2026 02:21 PM (GMT+05:30)

    सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पंजाब सरकार आवारा और खतरनाक कुत्तों के खिलाफ कल से बड़ा अभियान शुरू करेगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बच्चों और राहगीरों क ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पंजाब सरकार का अभियान।

    2. स्कूलों, अस्पतालों से हटाए जाएंगे आवारा कुत्ते।

    3. नसबंदी, टीकाकरण और आश्रय स्थलों पर जोर।

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। आवारा कुत्तों और पशुओं से बढ़ते खतरे को लेकर भारत के सर्वोच्च न्यायालय की सख्ती के बाद पंजाब सरकार भी हरकत में आ गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया है कि बच्चों और राहगीरों की जान के लिए खतरा बने आवारा और खतरनाक कुत्तों के खिलाफ पंजाब सरकार कल से बड़ा अभियान शुरू करेगी। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में सर्वोच्च न्यायालय का धन्यवाद भी किया।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पंजाब सरकार बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कार्रवाई करेगी। उनके इस बयान के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है और संबंधित विभागों को तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

    सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में आवारा कुत्तों और पशुओं को लेकर राज्यों, नगर निकायों और प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने साफ कहा है कि सड़कों, राजमार्गों, स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।

    सूत्रों के अनुसार पंजाब में सभी नगर निगम आयुक्तों और संबंधित अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय और ग्रामीण इलाकों में पशुपालन तथा पंचायत विभाग मिलकर अभियान चलाएंगे।

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    जाने क्या हैं सर्वोच्च न्यायालय के आदेश

    • सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नगर निकाय, लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण राजमार्गों तथा एक्सप्रेस मार्गों से आवारा पशुओं को तुरंत हटाएं। पकड़े गए पशुओं को गौशालाओं या निर्धारित आश्रय स्थलों में रखा जाए, जहां भोजन, पानी और इलाज की पूरी व्यवस्था हो।
    • अदालत ने चौबीस घंटे गश्त करने वाली विशेष टीमों के गठन के भी निर्देश दिए हैं, ताकि राजमार्गों पर आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही राजमार्गों और एक्सप्रेस मार्गों पर हेल्पलाइन नंबर वाले बोर्ड लगाने के आदेश भी दिए गए हैं, ताकि आम लोग तुरंत सूचना दे सकें।
    • स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों को लेकर अदालत ने विशेष सख्ती दिखाई है। सभी सरकारी और निजी संस्थानों को अपने परिसरों की मजबूत घेराबंदी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आवारा कुत्ते अंदर प्रवेश न कर सकें। हर संस्थान में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जिसका नाम और संपर्क नंबर मुख्य द्वार पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
    • अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि संस्थानों से पकड़े गए कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण कराने के बाद उन्हें दोबारा उसी परिसर में नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उन्हें निर्धारित डॉग शेल्टर में रखा जाएगा।

    एंटी रेबीज वैक्सीन को स्टोर करने के आदेश

    इसके अलावा सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन और जरूरी दवाइयों का पर्याप्त भंडार रखने के आदेश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग को स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने को कहा गया है, ताकि बच्चों और कर्मचारियों को कुत्तों से बचाव और प्राथमिक उपचार की जानकारी दी जा सके।

    उच्च न्यायालय करेंगे निगरानी

    सर्वोच्च न्यायालय ने हर जिले में कम से कम एक पशु जन्म नियंत्रण केंद्र स्थापित करने और नसबंदी व टीकाकरण अभियान को बड़े स्तर पर बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं। अदालत ने साफ कहा है कि यदि आदेशों के पालन में लापरवाही पाई गई या दोबारा गंभीर घटनाएं हुईं तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। साथ ही इस पूरे मामले की निगरानी अब राज्यों के उच्च न्यायालय करेंगे, जो समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करेंगे।

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