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    'आपातकाल संविधान और लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार', 1975 के काले दौर पर बोले केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान

    Updated: Thu, 25 Jun 2026 12:59 PM (IST)

    केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 1975 के आपातकाल को संविधान और लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार बताया। ...और पढ़ें

    चंडीगढ़ में धर्मेंद्र प्रधान (फोटो: जागरण)

    चंडीगढ़ में धर्मेंद्र प्रधान (फोटो: जागरण)

    HighLights

    1. आपातकाल संविधान और लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार था।

    2. इतिहास से सीखकर लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना होगा।

    3. मौलिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला।

    बलवान करिवाल, चंडीगढ़। "संविधान हत्या दिवस" के अवसर पर टैगोर थिएटर में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र और संविधान पर सबसे बड़ा हमला बताया। उन्होंने कहा कि इतिहास को याद रखना इसलिए जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी गलतियां दोबारा न दोहराई जाएं और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सके।

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आपातकाल केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि लोगों के मौलिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सीधा प्रहार था। उन्होंने कहा कि उस दौर में पत्रकारों को लिखने से रोका गया, विपक्षी नेताओं को जेलों में डाला गया और आम नागरिकों की स्वतंत्रता छीन ली गई।

    उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या देश के पूर्वजों ने आजादी के लिए इसलिए संघर्ष किया था कि किसी एक व्यक्ति या परिवार की सत्ता बचाने के लिए लोकतंत्र को कुचल दिया जाए।

    प्रधान ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था हजारों वर्षों की सभ्यता, संघर्ष और बलिदान की देन है। अंग्रेजों और अन्य आक्रांताओं से लड़कर हासिल की गई आजादी को संविधान के माध्यम से मजबूत बनाया गया, लेकिन आपातकाल के दौरान उसी संविधान की भावना को आघात पहुंचाया गया। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्ता बचाने के लिए लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रख दिया गया था।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज देश में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने, सरकार की आलोचना करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने की स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का सम्मान होना चाहिए, लेकिन आपातकाल के दौरान असहमति को अपराध बना दिया गया था।

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    प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा कि आज भारत विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी किसी राजनीतिक परिवार की वजह से नहीं, बल्कि देश के गरीबों, महिलाओं, युवाओं और आम मतदाताओं के विश्वास के बल पर देश का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता लगातार भाजपा और एनडीए पर भरोसा जता रही है क्योंकि देश विकास और सुशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में हार मिलने पर लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुनाव आयोग और न्यायपालिका पर सवाल उठाना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और वैश्विक स्तर पर बन रही भारत की सकारात्मक छवि को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन देश की जनता सब कुछ देख रही है।

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आज भारत विश्व की प्रमुख शक्तियों में शामिल होने की ओर बढ़ रहा है और दुनिया की उम्मीदें भारत से जुड़ी हैं। ऐसे समय में लोकतंत्र, संविधान और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आपातकाल की घटनाओं को याद रखना इसलिए आवश्यक है ताकि आने वाली पीढ़ियां लोकतंत्र की कीमत और उसके महत्व को समझ सकें।

    कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह, चंडीगढ़ अध्यक्ष जितेंद्र पाल मल्होत्रा, सांसद रेखा शर्मा, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को भी याद किया गया।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा नौवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में आपातकाल से जुड़ा अध्याय शामिल करने का फैसला सराहनीय कदम है।

    इससे स्कूली छात्रों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि देश में लोकतंत्र को किस प्रकार बंधक बनाया गया था और संवैधानिक संस्थाओं पर किस तरह प्रहार हुआ था। उन्होंने कहा कि युवाओं को स्कूल स्तर पर ही उन परिस्थितियों और लोगों के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए जिन्होंने लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का काम किया।

    धर्मेंद्र प्रधान सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में "संविधान हत्या दिवस" के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी, चंडीगढ़ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।

    उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र और संविधान पर सबसे बड़ा हमला था। इतिहास को याद रखना इसलिए आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी गलतियां दोबारा न दोहराई जाएं। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और राजनीतिक विरोधियों को जेलों में डाल दिया गया।

    प्रधान ने कहा कि उस दौर में पत्रकारों को लिखने से रोका गया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता समाप्त कर दी गई और नागरिक अधिकारों का हनन हुआ। उन्होंने कहा कि क्या देश के पूर्वजों ने आजादी के लिए इसलिए संघर्ष किया था कि किसी एक व्यक्ति या परिवार की सत्ता बचाने के लिए लोकतंत्र को कुचल दिया जाए।

    उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था हजारों वर्षों के संघर्ष और बलिदान की विरासत है। संविधान को सर्वोपरि मानकर देश आगे बढ़ा, लेकिन आपातकाल के दौरान उसी संविधान की भावना पर प्रहार किया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता बचाने के लिए लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रख दिया गया था।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज देश में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने, सरकार की आलोचना करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने की स्वतंत्रता है। लोकतंत्र में असहमति का सम्मान होना चाहिए, लेकिन आपातकाल के दौरान असहमति को अपराध बना दिया गया था।

    प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी किसी राजनीतिक परिवार की वजह से नहीं, बल्कि देश के गरीबों, महिलाओं, युवाओं और आम मतदाताओं के विश्वास के बल पर देश का नेतृत्व कर रहे हैं। जनता लगातार भाजपा और एनडीए पर भरोसा जता रही है क्योंकि देश विकास और सुशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। कुछ ताकतें देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और वैश्विक स्तर पर बन रही भारत की सकारात्मक छवि को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन देश की जनता सब कुछ देख रही है।

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आज भारत विश्व की प्रमुख शक्तियों में शामिल होने की ओर बढ़ रहा है और दुनिया की उम्मीदें भारत से जुड़ी हैं। ऐसे समय में लोकतंत्र, संविधान और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है।

    उन्होंने लोगों से आपातकाल की घटनाओं को याद रखने और आने वाली पीढ़ियों को इसके बारे में जागरूक करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में भाजपा चंडीगढ़ अध्यक्ष संजय टंडन, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।