ब्रिटेन में जेल से चलता रहा ड्रग्स का कारोबार, 3 पंजाबियों को मिली सजा; पूर्व मजिस्ट्रेट का घर बना नशे का अड्डा
ब्रिटेन की अदालत ने पंजाब मूल के तीन लोगों को संगठित नशा तस्करी मामले में कुल 22 साल 10 महीने की जेल सुनाई। जांच में खुलासा हुआ कि जेल से मोबाइल के जर ...और पढ़ें

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रोहित कुमार, चंडीगढ़। ब्रिटेन में एक संगठित नशा तस्करी नेटवर्क का ऐसा खुलासा हुआ है। जिसने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया। इस पूरे गिरोह का संचालन एक ओर जेल में बंद सरगना मोबाइल फोन के जरिए करता रहा, जबकि दूसरी ओर न्यायिक पद पर कार्यरत एक पूर्व मजिस्ट्रेट का घर नशीले पदार्थों के भंडारण और नेटवर्क के संचालन का सुरक्षित ठिकाना बना हुआ था।
इस मामले में पंजाब मूल के हरदीप थिंद उर्फ हैरी सिंह, पूर्व मजिस्ट्रेट पुरशोत्तम ढिल्लों और बिक्रमजीत बराड़ को दोषी ठहराते हुए अदालत ने कुल 22 साल 10 महीने की जेल की सजा सुनाई है। पश्चिमी लंदन में इस ड्रग्स नेटवर्क की परतें तब खुलनी शुरू हुईं, जब मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने हादी नाम से चल रही एक अत्यधिक सक्रिय ड्रग्स लाइन को ट्रैक किया।
शुरुआती पड़ताल में मामला सामान्य ड्रग्स सप्लाई का लग रहा था, लेकिन काल रिकार्ड, फोरेंसिक साक्ष्य और मोबाइल फोन से निकले डेटा ने ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया, जिसमें जेल में बंद अपराधी से लेकर न्यायिक पद पर बैठा व्यक्ति तक शामिल मिला।
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डेढ़ साल की जांच के बाद तीन दोषी करार
करीब डेढ़ साल चली जांच के बाद क्रॉयडन क्राउन कोर्ट ने तीनों दोषियों को सजा सुनाई। जांच में सामने आया कि नेटवर्क अक्टूबर 2024 से जुलाई 2025 के बीच पश्चिमी लंदन में कई ड्रग्स लाइनों के जरिए हेरोइन और क्रैक कोकीन की सप्लाई कर रहा था। पुलिस के मुताबिक गिरोह ने एक लाख पाउंड (करीब 1.24 करोड़ रुपये) से अधिक मूल्य के नशीले पदार्थों का कारोबार किया।
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जांच की सबसे चौंकाने वाली कड़ी 48 वर्षीय हरदीप थिंद उर्फ हैरी सिंह रहा। पुलिस के अनुसार वही पूरे नेटवर्क का रिंगलीडर था। थिंद पहले से हेरोइन और कोकीन सप्लाई की साजिश तथा प्रतिबंधित हथियार स्कॉर्पियन सबमशीन गन रखने के मामले में 17 साल की सजा काट रहा था। इसके बावजूद उसका नेटवर्क बंद नहीं हुआ। जांच में खुलासा हुआ कि ओपन जेल में रहते हुए उसके पास मोबाइल फोन था और वह जेल के भीतर से ही ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क को निर्देश देता रहा।
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समय के साथ बढ़ाया नेटवर्क
अक्टूबर 2024 में रिहाई के बाद थिंद ने नेटवर्क को और विस्तार दिया। उसने पश्चिमी लंदन के हेज और साउथॉल इलाकों में नए डीलर जोड़े और सप्लाई चैन को मजबूत किया। पुलिस के मुताबिक थिंद का काम सप्लाई की निगरानी करना, नेटवर्क का संचालन संभालना और अलग-अलग ड्रग्स लाइनों को निर्देश देना था। कोर्ट ने उसे 12 साल 6 महीने की सजा सुनाई।
जांच में दूसरी अहम कड़ी 59 वर्षीय पुरशोत्तम ढिल्लों रहा, जो गिरफ्तारी के समय ब्रिटेन में मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यरत था। पुलिस के मुताबिक ढिल्लों ने अपने घर को ड्रग्स रखने, नकदी जमा करने और उपकरण छिपाने के लिए इस्तेमाल होने दिया।
यही नहीं, उसका पद नेटवर्क के लिए सुरक्षा कवच जैसा काम कर रहा था। मेट्रोपॉलिटन पुलिस की स्पेशलिस्ट क्राइम यूनिट के डिटेक्टिव इंस्पेक्टर मार्क गैविन ने कहा कि ढिल्लों ने भरोसे और जिम्मेदारी वाले पद का सबसे गंभीर तरीके से दुरुपयोग किया। कोर्ट ने ढिल्लों को 7 साल की जेल सुनाई।
नेटवर्क में हर सदस्य की अलग भूमिका रही
नेटवर्क की तीसरी अहम कड़ी 46 वर्षीय बिक्रमजीत बराड़ था। जांच में पाया गया कि बराड़ ड्रग्स को होल्ड करने और आगे सप्लाई करने की जिम्मेदारी संभाल रहा था। नेटवर्क में उसकी भूमिका सप्लाई चेन को चालू रखने की थी। कोर्ट ने उसे 3 साल 4 महीने की सजा दी।
मेट पुलिस का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में हर सदस्य की भूमिका पहले से तय थी। कोई सप्लाई नियंत्रित कर रहा था, कोई स्टोरेज संभाल रहा था और कोई वितरण। जांच एजेंसियों ने कॉल डेटा रिकार्ड, फोरेंसिक सबूत और फोन डाउनलोड्स को जोड़कर पूरे नेटवर्क की गतिविधियों को ट्रेस किया।
डिटेक्टिव इंस्पेक्टर मार्क गैविन ने कहा कि यह मामला साफ संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं। न्यायिक पद पर बैठा व्यक्ति हो या संगठित अपराध का सरगना—अपराध में शामिल हर व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जाएगा। पुलिस का मानना है कि इस कार्रवाई से पश्चिमी लंदन में सक्रिय एक बड़े ड्रग्स नेटवर्क की कमर टूट गई है।