नशे की दूसरी खतरनाक लहर! पंजाब में ड्रोन से तस्करी व फार्मा दवाओं से फैल रहा नशा, रिकॉर्ड जब्ती ने बढ़ाई चिंता
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पंजाब नशा तस्करी का सबसे बड़ा केंद्र बना है, जहां फार्मा दवाओं और ड्रोन के जरिए हेरोइन सप्लाई तेजी ...और पढ़ें

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HighLights
पंजाब में फार्मा ओपिओइड्स और ड्रोन तस्करी से नशा बढ़ा।
एनसीबी रिपोर्ट 2025: कोडीन सिरप, हेरोइन की रिकॉर्ड जब्ती।
ड्रोन से नशा तस्करी में 100 गुना वृद्धि, गंभीर चुनौती।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही जंग के बीच अब फार्मा ओपिओइड्स नया और गंभीर खतरा बनकर उभरे हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की वर्ष 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पारंपरिक ड्रग्स, खासकर हेरोइन के साथ-साथ अब कोडीन आधारित कफ सिरप और अन्य प्रिस्क्रिप्शन दवाओं का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में पंजाब को इस उभरते संकट का सबसे बड़ा केंद्र बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में पंजाब से 8,95,508 कोडीन आधारित कफ सिरप की बोतलें जब्त की गई, जो देश में किसी भी राज्य की तुलना में सबसे अधिक हैं। एनसीबी ने इसे पंजाब में नशे की दूसरी खतरनाक लहर करार दिया है। एजेंसी के मुताबिक फार्मा ओपिओइड्स का बढ़ता दुरुपयोग इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि इन दवाओं तक पहुंच पारंपरिक नशीले पदार्थों की तुलना में अधिक आसान है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बुप्रेनार्फिन, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी कानूनी रूप से निर्मित दवाएं गैर-अनुपालक मेडिकल स्टोरों और फार्मेसी नेटवर्क के जरिए अवैध बाजार तक पहुंच रही हैं। इन दवाओं की उपलब्धता ने युवाओं के लिए नशीले पदार्थों तक पहुंच और आसान बना दी है।
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एनसीबी ने दी चेतावनी
एनसीबी ने चेतावनी दी है कि भारत की फार्मास्युटिकल क्षमता जहां वैश्विक स्तर पर मजबूत मानी जाती है, वहीं यही सेक्टर अवैध सप्लाई चेन के लिए भी संवेदनशील बनता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार 2011 से 2025 के बीच फार्मा ड्रग्स की जब्ती में 77 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो नियामकीय निगरानी और प्रवर्तन एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है।
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एनसीबी रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब अब भी देश में हेरोइन तस्करी का सबसे बड़ा हाटस्पाट बना हुआ है। वर्ष 2025 में देशभर में जब्त 3567 किलोग्राम हेरोइन में से 2085.55 किलोग्राम अकेले पंजाब से बरामद हुई। यह राष्ट्रीय स्तर पर कुल जब्ती का लगभग 58 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान कॉरिडोर यानी गोल्डन क्रेसेंट से आने वाली ड्रग तस्करी में पंजाब की केंद्रीय भूमिका बनी हुई है।
ड्रोन से तस्करी से रिकॉर्ड टूटे
सीमा पार से ड्रोन के जरिए होने वाली तस्करी भी रिकाॅर्ड स्तर पर पहुंच गई है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में भारत-पाक सीमा पर ड्रोन के जरिए नशा तस्करी के 305 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 289 मामले (करीब 97.7 प्रतिशत) अकेले पंजाब में सामने आए।
ड्रोन के जरिए कुल 468 किलोग्राम ड्रग्स, मुख्य रूप से हेरोइन, जब्त की गई। एनसीबी ने कहा कि तस्कर अब पारंपरिक सीमा सुरक्षा को चकमा देने के लिए ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
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भारत-पाक सीमा पर ड्रोन से नशा तस्करी बढ़ी
भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन के जरिए नशा तस्करी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की 2025 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में ड्रोन आधारित नशा तस्करी के मामलों में करीब 100 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में जहां केवल 3 मामले सामने आए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 305 तक पहुंच गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में ड्रोन के जरिए 468 किलो नशीले पदार्थ जब्त किए गए, जो 2024 की तुलना में 96 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2024 में 178 मामलों में 236 किलो ड्रग्स बरामद हुई थी। इससे स्पष्ट है कि तस्कर अब पारंपरिक तरीकों के बजाय आधुनिक तकनीक का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।
पंजाब सबसे प्रभावित राज्य बना
पंजाब इस खतरे से सबसे अधिक प्रभावित राज्य बनकर सामने आया है। 2025 में देशभर के 305 मामलों में से 298 मामले अकेले पंजाब में दर्ज किए गए। राज्य में 461 किलो नशीले पदार्थ जब्त हुए, जिनमें मुख्य रूप से 449.751 किलो हेरोइन और 9.018 किलो मेथामफेटामिन शामिल है।
एनसीबी के अनुसार, पाकिस्तान स्थित तस्करी नेटवर्क ड्रोन और यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स) के जरिए सीमा पार से नशे की खेप भेज रहे हैं, जिससे पारंपरिक सीमा सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती मिल रही है। एजेंसियों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताया है।