मां ने नहीं मानी हार, अजन्मे बच्चे के हक के लिए 4 साल लड़ी लड़ाई, अब भ्रूण को मिली कानूनी मान्यता
चंडीगढ़ अदालत ने अजन्मे बच्चे को कानूनी मान्यता देते हुए एक मां को 1.80 लाख रुपये मुआवजा देने का फैसला सुनाया है।
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हादसे में गंवाए अजन्मे बच्चे को मिली कानूनी मान्यता।
HighLights
मां ने अजन्मे बच्चे के हक के लिए 4 साल लड़ाई लड़ी
चंडीगढ़ अदालत ने भ्रूण को कानूनी मान्यता दी, मुआवजा मिला
सड़क हादसे के कारण गर्भपात हुआ था, मां हुई थी घायल
रवि अटवालlजागरण चंडीगढ़। वो कहते हैं न कि ऊपर भगवान है तो नीचे धरती पर उसका रूप मां है। एक मां अपनी संतान के लिए कुछ भी कर सकती है लेकिन जरा सोचिए कि तब क्या हो जब गर्भ में पल रहा बच्चा किसी की गलती की भेंट चढ़ जाए। जी हां 4 साल पहले खन्ना के पास हुए सड़क हादसे ने एक दंपती से उनके अजन्मे बच्चे की उम्मीद छीन ली।
हादसे में मां बुरी तरह घायल हो गई। वह एक हाथ से 40 प्रतिशत दिव्यांग हो गई। इलाज और दवाओं के कारण गर्भ में पल रहे बच्चे को खतरा पैदा हुआ। हालात ऐसे हो गए कि मां को गर्भपात करवाना पड़ा।
अजन्मे बच्चे को मिला कानूनी हक
अपने अजन्मे बच्चे को उसका कानूनी हक दिलाने के लिए मां ने चंडीगढ़ जिला अदालत में चार साल केस लड़ा। अब आखिरकार अदालत ने अजन्मे बच्चे को कानूनी मान्यता देते हुए पीड़ित दंपती को 1.80 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का फैसला सुनाया है।
कब हुआ था हादसा?
बता दें कि ये हादसा 8 जून 2022 की सुबह हुआ था। जीरकपुर निवासी नेहा गर्ग अपने पति अमूल्य गुप्ता, सास और ससुर के साथ कार से मोगा जा रही थीं। खन्ना के पास जीटी रोड पर एक तेज रफ्तार कार ने उनकी गाड़ी को टक्कर मार दी।
नेहा समेत पूरा परिवार बुरी तरह घायल हो गया था। हादसे के समय नेहा छह सप्ताह व चार दिन की गर्भवती थीं। इलाज के दौरान डाक्टर को लगा कि गर्भ जारी रखना जोखिम भरा होगा।
डॉक्टरों की सलाह पर कराना पड़ा गर्भपात
इसके अलाा दवाओं और रेडिएशन के कारण भ्रूण में गंभीर विकृति की आशंका थी। डाक्टरों की सलाह पर 20 जून 2022 को नेहा को गर्भपात कराना पड़ा। इस क्षति के लिए उन्होंने चालक दिल्ली निवासी विश्वनाथ सिंह और लिबर्टी जनरल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ चंडीगढ़ मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर दी।
