सड़कों और बाजारों में सन्नाटा... क्या है कौमी इंसाफ मोर्चा, जिसने पंजाब को 7 घंटे रखा बंद? पढ़ें इसके बनने की कहानी
कौमी इंसाफ मोर्चा सिख संगठनों का समूह है। यह अपनी सजा पूरी कर चुके बलवंत सिंह राजोआना और देवेंद्र पाल ...और पढ़ें

क्या है कौमी इंसाफ मोर्चा (जागरण ग्राफिक्स)
HighLights
पंजाब में कौमी इंसाफ मोर्चा ने किया सात घंटे का बंद
सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर हुआ यह प्रदर्शन
बलवंत सिंह राजोआना, जगतार हवारा की रिहाई प्रमुख मांग
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। पंजाब में शुक्रवार को बंद जैसे हालात देखने को मिले। सुबह सात बजे से लेकर दोपहर दो बजे तक दुकानें-बाजार और सड़कें सुनसान नजर आईं। वजह बंदी सिखों की रिहाई को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा का प्रदर्शन।
20 अगस्त को पंजाब बंद का एलान किया गया था। पंजाब बंद से करीब 18 जिले बुरी तरह प्रभावित नजर आए। अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए जगह-जगह पुलिस बल भी तैनात था।
पूरे पंजाब में बंद जैसी स्थिति का एलान करने वाला कौमी इंसाफ मोर्चा आखिर क्या है और यह क्यों बना, इसका संचालन कौन करता है और यह मोर्चा किन सिखों की रिहाई की मांग कर रहा है? इन सभी के सवाल आज हम इस आर्टिकल के जरिए जानेंगे।
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बाजार सूने, यात्री परेशान
कौमी इंसाफ मोर्चा की ओर से शुक्रवार को सात घंटे बंद की कॉल दी गई थी। इसी के चलते राज्यभर में दुकानदारों की ओर से दुकानें बंद रखी गईं और कई जगह सड़कों पर भी सन्नाटा पसरा रहा। सात घंटे के बंद के कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
इसके साथ ही कई जगह एंबुलेंस भी जाम में फंसी रहीं। कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प भी हुई, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया लेकिन बाद में रिहा कर दिया।

क्या है कौमी इंसाफ मोर्चा?
कौमी इंसाफ मोर्चा (QIM) सिखों का एक संगठन है जो जेल में सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों की रिहाई की मांग कर रहा है। इस अभियान की शुरुआत 7 जनवरी, 2023 से चंडीगढ़ में सेक्टर 52-53 और मोहाली में YPS चौक से हुई थी।
अमृतपाल सिंह की पार्टी शिरोमणि अकाली दल (वारिस पंजाब दे), SAD (पुनर सुरजीत) और निहंग संगठनों समेत कई सिख संस्थाओं और राजनीतिक दलों ने 'कौमी इंसाफ मोर्चा' को अपना समर्थन दिया है।
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किन सिखों की रिहाई चाहता है मोर्चा?
कौमी इंसाफ मोर्चा पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या और 1993 दिल्ली बम धमाके जैसे मामलों में सजा काट रहे बंदियों की रिहाई और पैरोल की मांग कर रहा है। मोर्चे की मुख्य मांगों में बलवंत सिंह राजोआना शामिल हैं, जिन्हें 2007 में फांसी की सजा सुनाई गई थी लेकिन इसे कई बार टाला जा चुका है।
इसके अलावा जगतार सिंह हवारा की रिहाई और पैरोल की मांग की जा रही है, जिन्हें फांसी की सजा मिली थी जिसे 2010 में उम्रकैद में बदल दिया गया था। इन सब के अलावा मोर्चा 1993 दिल्ली बम धमाके के आरोपी देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर, जगतार सिंह तारा (उम्रकैद), परमजीत सिंह भ्योरा (फांसी की सजा) और देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर की रिहाई चाहता है।

मोर्चे का नेतृत्व कौन कर रहा है?
मोर्चे के कन्वीनर भाई पाल सिंह फ्रांस हैं। इन्होंने ही पंजाब बंद का एलान किया था। पंजाब बंद को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी), अकाली दल वारिस पंजाब दे, किसान संगठनों के साथ-साथ व्यापारी संगठनों ने भी पूर्ण समर्थन दिया।
