कार का 6.56 लाख लोन पेंडिंग, फर्जी NOC तैयार कर बेची, RTO ऑफिस में रिकॉर्ड कैसे बदला? मोहाली पुलिस जांच में जुटी
जीरकपुर में सेकेंड हैंड कार की बिक्री में फर्जी बैंक एनओसी और आरटीओ रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर 6.56 लाख रुपये के लोन का खुलासा हुआ है। पुलिस ने आरोपित दी ...और पढ़ें

सेकेंड हैंड कारों के कारोबार में फर्जी बैंक एनओसी से धोखाधड़ी का खुलासा।
HighLights
फर्जी बैंक एनओसी से सेकेंड हैंड कार बेची गई।
कार पर कोटक महिंद्रा बैंक का 6.56 लाख बकाया।
आरटीओ रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर लोन मुक्त बताया।
संवाद सहयोगी, जीरकपुर (मोहाली)। सेकेंड हैंड कारों के कारोबार में फर्जी बैंक एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) और आरटीओ ऑफिस के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।
जांच में खुलासा हुआ कि जिस कार को लोन मुक्त बताकर बेचा गया था, उस पर कोटक महिंद्रा बैंक का 6.56 लाख रुपये से अधिक का बकाया लोन था। जीरकपुर थाना पुलिस ने आरोपित दीपक चावला के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पंचकूला निवासी अजय नैन ने पुलिस को बताया कि वह कार-24 की डीलरशिप के माध्यम से सेकेंड हैंड वाहनों का कारोबार करते हैं। 4 अगस्त 2025 को दीपक चावला ने अपनी मारुति स्विफ्ट कार बेचते समय दावा किया कि वाहन पर किसी प्रकार का बैंक लोन नहीं है।
ऑनलाइन रिकॉर्ड भी लोन मुक्त दिखाई देने पर अजय ने 5.75 लाख रुपये में कार खरीद ली। बाद में जब कार को आगे बेचने के लिए नए खरीदार ने फाइनेंस करवाने के लिए बैंक से संपर्क किया तो पता चला कि वाहन पर कोटक महिंद्रा बैंक का 6,56,421 रुपये का लोन अब भी बकाया है।
शिकायत मिलने पर पुलिस ने लुधियाना आरटीओ से रिकाॅर्ड मंगवाया, जहां वाहन की हाइपोथिकेशन हटाने के लिए जमा कराई गई एनओसी मिली। कोटक महिंद्रा बैंक से सत्यापन कराने पर पता चला कि संबंधित एनओसी बैंक ने जारी ही नहीं की थी।
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दस्तावेज में दर्ज लोन एग्रीमेंट नंबर भी फर्जी निकला। बैंक ने पुष्टि की कि वाहन का लोन खाता अब भी सक्रिय है और उस पर भारी बकाया राशि दर्ज है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपित ने फर्जी एनओसी तैयार कराकर आरटीओ रिकॉर्ड में बदलाव कराया और वाहन को लोन मुक्त बताकर बेच दिया।
पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कोटक महिंद्रा बैंक ने पुलिस को लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि वाहन की हाइपोथिकेशन हटाने के लिए इस्तेमाल की गई एनओसी बैंक द्वारा जारी नहीं की गई थी।
जांच में एनओसी पर अंकित लोन एग्रीमेंट नंबर भी फर्जी पाया गया। बैंक ने पुष्टि की कि वाहन पर 20 फरवरी 2026 तक 6,56,421 रुपये का लोन बकाया था, जिससे पूरे धोखाधड़ी का खुलासा हो गया।