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    फिरोजपुर में ​​​हरिके हेड से निकली बूटे वाह नहर दो जगहों पर टूटी, 150 एकड़ धान की फसल जलमग्न; किसानों में रोष

    Updated: Fri, 26 Jun 2026 09:03 PM (IST)

    फिरोजपुर के मल्लांवाला में हरिके हेड से निकली बूटे वाह नहर दो स्थानों पर टूट गई, जिससे लगभग 150 एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई। किसानों ने सिंचाई विभ ...और पढ़ें

    टूटी नहर व किनारा बांधने में जुटे किसान।

    टूटी नहर व किनारा बांधने में जुटे किसान।

    HighLights

    1. बूटे वाह नहर मल्लांवाला के पास दो स्थानों पर टूटी

    2. लगभग 150 एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई

    3. किसानों ने सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया

    संवाद सूत्र, मल्लांवाला (फिरोजपुर)। हरिके हेड से निकली बूटे वाह नहर मल्लांवाला से जैमलवाला पुल के बीच दो स्थानों पर टूट गई, जिससे करीब 150 एकड़ में लगी धान की फसल जलमग्न हो गई। किसानों का आरोप है कि घटना की सूचना देने के बावजूद काफी देर तक सिंचाई विभाग का कोई अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिसके चलते नुकसान बढ़ता गया।

    किसान महल सिंह ने बताया कि नहर में पानी छोड़े जाने के बाद से ही यह ओवरफ्लो हो रही थी। नहर में बड़ी मात्रा में जलीय घास (गरलाली) जमा होने से पानी का बहाव प्रभावित हो रहा था। किसानों ने अपने खर्च पर मजदूर लगाकर घास की सफाई भी करवाई, लेकिन विभाग ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की।

    किसान गुलाब सिंह ने बताया कि पुल के नीचे से पानी का बहाव बड़ी मुश्किल से सुचारु किया गया। इस दौरान किसानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मिट्टी और बोरियों की मदद से नहर के कटाव को रोकने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि कलगा सिंह की हवेलियों के पास करीब 20 फुट चौड़ा कटाव हो गया, जिससे निकला पानी मल्लांवाला-जैमलवाला सड़क तक पहुंच गया और आसपास के खेतों में फैल गया।

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    इससे लगभग 150 किल्ले में लगी धान की फसल पूरी तरह पानी में डूब गई। किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। घटना के संबंध में सिंचाई विभाग के जेई सुखचैन सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन का जवाब नहीं दिया। वहीं, नहर का पानी भी तत्काल बंद नहीं कराया गया।

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    इस संबंध में एसडीओ नवनीत गुप्ता ने बताया कि विभाग को दोनों स्थानों पर नहर टूटने की सूचना मिल चुकी है और टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने बाद में फोन पर बताया कि नहर का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। पानी घटने के बाद राहत एवं मरम्मत कार्य शुरू कर कटाव को भरने की कार्रवाई की जाएगी।

    हालांकि, समाचार लिखे जाने तक स्थानीय लोगों और किसानों का कहना था कि मौके पर सिंचाई विभाग का कोई अधिकारी या कर्मचारी नहीं पहुंचा था। किसानों ने प्रशासन से प्रभावित फसलों का जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने तथा नहर की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है।