Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पंजाब के फिरोजपुर में चार एकड़ जमीन बेच 50 लाख खर्च कर बेटे को भेजा था अमेरिका, बीमारी ने छीन ली जिंदगी

    Updated: Sat, 11 Jul 2026 10:28 PM (GMT+05:30)

    फिरोजपुर के गांव मुस्सेवाले के मनदीप सिंह रोजी की अमेरिका में बीमारी के कारण मौत हो गई, जो चार साल पहले डोंकी रूट से गए थे। उनके पिता ने 50 लाख रुपये ...और पढ़ें

    50 लाख खर्च कर बेटे को भेजा था अमेरिका। फोटो जागरण

    50 लाख खर्च कर बेटे को भेजा था अमेरिका। फोटो जागरण

    HighLights

    1. फिरोजपुर के मनदीप सिंह की अमेरिका में मौत।

    2. चार साल पहले डोंकी रूट से गए थे विदेश।

    3. पिता ने शव भारत लाने की मांग की।

    संवाद सहयोगी, फिरोजपुर। जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए कामकाज की तलाश में चार वर्ष पहले डोंकी रूट के माध्यम से अमेरिका गए कस्बा गुरुहरसहाय के गांव मुस्सेवाले के युवक की तबीयत खराब होने के चलते दर्दनाक मौत हो गई।

    मृतक की पहचान मनदीप सिंह रोजी पुत्र गुरनाम ङ्क्षसह के रूप में हुई है। पिता गुरनाम सिंह ने बताया कि उसने अपनी चार एकड़ भूमि बेचकर करीब 50 लाख रूपएं लगाकर उसे भेजा था और वह एक वर्ष बार विभिन्न देशों में घूमता हुआ अमेरिका पहुंचा था।

    उन्होंने बताया एजेंटो द्वारा पहले उसके बेटे को थाईलैंड, मलेशिया, इंगलैंड, फ्रांस, मैक्सिकों के जंगलों के माध्यम से अमेरिका में प्रवेश करवाया गया था। जहां पर पुलिस द्वारा उसे पकड़ा और उसे एक ही शहर में रहने के आदेश दिए गए।

    बिलखिलाते पिता गुरनाम सिंह ने कहा कि उसका बेटा दिन-रात अलग-अलग काम कर अपना कर्जा उतारने तथा घर की आर्थिक दशा को मजबूत करने की कोशिश करता था। उन्होंने कहा कि जब भी उसकी बेटे से बात होती तो वह अपनी बहनों की शादी धूमधाम से करने की इच्छा रखता था। उसकी एक बहन की शादी पहले हो चुकी है। गुरनाम की दो बेटिया और दो बेटे थे, जिसमें मनदीप ही विदेश गया था।

    खबरें और भी

    उन्होंने बताया कि मनदीप पिछलें तीन सप्ताह से खांसी और बुखार से ग्रसित था। उन्होंने गांव से भी उसके लिए दवाई भेजी थी। कुछ दिन फर्क पड़ने के बाद फिर से उसकी समस्या बढ़ गई थी तो चार दिन से वह अस्पताल में भर्ती रहा, जिसके बाद आज सुबह उसकी मौत हो गई।

    गुरनाम सिंह ने कहा कि उसका बेटा ही उसके बुढ़ापे का सहारा था। उन्होंने बताया कि वह खुद छह बहनों का इकलौता भाई था और आगे उसके भी दो बेटिया है। बड़ी उम्मीदों के साथ बेटे को विदेश भेजा था। उन्होंने केन्द्र व राज्य सरकार से मांग की है कि उनके बेटे के शव को भारत लाने में सहायता की जाए।