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    रूस-यूक्रेन युद्ध का शिकार हुआ पंजाब का लाल, एजेंटों के चंगुल में फंसकर गंवाई जान; मौत के 9 महीने बाद भारत पहुंचा शव

    Updated: Sun, 10 May 2026 02:37 PM (GMT+05:30)

    श्री हरगोबिंदपुर के गांव भोझा के गुरसेवक सिंह की रूसी युद्ध में मौत हो गई, जिनका शव नौ महीने बाद गांव पहुंचा। परिवार ने बेटे को जर्मनी भेजने के लिए कर ...और पढ़ें

    रूसी जंग में मौत के बाद करीब नौ महीने बाद गांव पहुंचा गुरसेवक सिंह का शव।

    रूसी जंग में मौत के बाद करीब नौ महीने बाद गांव पहुंचा गुरसेवक सिंह का शव।

    HighLights

    1. गुरसेवक सिंह की रूसी युद्ध में हुई मौत

    2. नौ महीने बाद गांव पहुंचा शहीद का शव

    3. डीएनए टेस्ट के लिए परिवार ने बेचा घर

    जागरण संवाददाता, बटाला। परिवार की आर्थिक हालत सुधारने के लिए वर्क परमिट पर जर्मन गए हलका श्री हरगोबिंदपुर के गांव भोझा के युवक गुरसेवक सिंह की मौत की खबर से इलाके में शोक और दुख की लहर दौड़ गई है। परिवार ने गुरसेवक सिंह को जर्मन भेजने के लिए परिजनों और पहचान वालों से कर्ज लिया था।

    लेकिन गुरसेवक सिंह रूसी सेना में भर्ती कैसे हुआ अभी तक परिवार के लिए रहस्य बना हुआ है। परिवार के हालात इतने खराब हैं कि बेटे के शव की पहचान करने के लिए डीएनए टेस्ट की फीस अपना घर बेच कर चुकानी पड़ी थी।

    गुरबाज सिंह ने बताया कि उसका भाई गुरसेवक 2025 में वर्क परमिट पर जर्मन गया था। लेकिन पता नहीं कैसे वह वहां से किसी एजेंट के माध्यम से रूस की फौज में भर्ती होगया। गुरसेवक सिंह के साथ आखरी बार सितंबर में वीडियो कॉल पर बात हुई थी। गुरसेवा सिंह को रूसी फौज में यह कह कर भर्ती किया गया था कि उसे फौजी कैंप में तैनात किया जाएगा।

    लेकिन उसे पता नहीं था कि लड़ाई की आग में गुरसेवक को झोंक दिया जाएगा। लेकिन सितंबर 2025 के बाद से गुरसेवक से कोई संपर्क हो पाया। परिवार की तरफ से गुरसेवक सिंह की खोज खबर के लिए पंजाब और केंद्र सरकार को कई पत्र लिखे लेकिन कोई जवाब नहीं आया और न ही गुरसेवक का पता चला। करीब पच्चीस दिन पहले परिवार को भारत सरकार की तरफ से जानकारी मिली कि उनके बेटे की मौत रूसी सेना में हुई है और उसकी पहचान के लिए डीएनए टेस्ट भेजना होगा।

    खबरें और भी

    गुरबाज सिंह ने बताया की शुक्रवार को प्रशासन की तरफ से पता चला कि गुरसेवक सिंह का शव दिल्ली पहुंच चुका है। जिसके बाद परिवार उसके पार्थिव शरीर को गांव बोजा लाया गया । रूसी सेना की तरफ से गुरसेवक की अंतिम विदाई सैन्य सम्मान के साथ की गई थी। रूसी सरकार द्वारा डेथ सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया है। शनिवार देर शाम को गमगीन माहौल में गुरसेवक सिंह का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में कर दिया गया।

    वहीं गांव वासियों और परिजनों ने पंजाब सरकार व केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा है कि गुरसेवक सिंह के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, ताकि परिवार का गुजारा चल सके।

    बाक्स- गुरसेवक सिंह की मौत रूसी जंग के दौरन कैसे हुई अभी तक परिवार को जानकारी नहीं है। परिवार के बुरे आर्थिक हालात खुद ब्यान कर रहे हैं कि जब रशियन फौज की तरफ से मृतक के परिजनों से डीएनए टेस्ट मांगा था तो परिवार के पास टेस्ट के लिए रुपये चाहिए थे। अपने बेटे की मृतक देह मंगवाने के लिए परिवार ने अपना घर बेच कर डीएनए टेस्ट करवा कर भेजना पड़ा। जिसके बाद जिस दौरान परिवार का डीएनए टेस्ट कर पहचान हो पाई थी। जिस कारण गुरसेवक का शव देरी से पहुंचा।