Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    नकली थाना, फर्जी अधिकारी और खाते से 22 लाख ट्रांसफर... जालंधर में रिटायर्ड कर्मचारी के साथ ठगी से सनसनी

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 11:28 PM (IST)

    जालंधर में साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड बिजली कर्मचारी को 'डिजिटल अरेस्ट' के जाल में फंसाकर 22 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने नकली पुलिस स्टेशन और फर्जी अधिका ...और पढ़ें

    नकली थाना, फर्जी अधिकारी और खाते से 22 लाख ट्रांसफर...

    नकली थाना, फर्जी अधिकारी और खाते से 22 लाख ट्रांसफर...

    HighLights

    1. जालंधर में रिटायर्ड कर्मचारी से 22 लाख की ठगी।

    2. साइबर ठगों ने 'डिजिटल अरेस्ट' का झांसा देकर फंसाया।

    3. नकली पुलिस स्टेशन, फर्जी अधिकारी दिखाकर पैसे ऐंठे।

    सुक्रांत, जालंधर। महानगर में साइबर ठगों ने रिटायर्ड बिजली विभाग के एक रिटायर्ड कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाकर 22 लाख रुपये ठग लिए।

    मकसूदां के पास रहने वाले पीड़ित को ठगों ने पहले फोन किया और फिर वीडियो काल के जरिए इतना डराया कि उन्होंने अपनी वर्षों की जमा पूंजी साइबर अपराधियों के बताए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। जब तक उन्हें ठगी का अहसास हुआ, तब तक उनके खाते से 22 लाख रुपये निकल चुके थे।

    पीड़ित को एक अज्ञात नंबर से काल आई। फोन करने वाले ने खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके बैंक खाते में मनी लांड्रिंग से जुड़ी संदिग्ध रकम आई है और उनके खिलाफ जांच चल रही है। मामला बेहद गंभीर है और यदि सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    कुछ ही देर बाद पीड़ित को वीडियो काल पर जोड़ा गया। वीडियो काल में एक कमरे को पुलिस स्टेशन जैसा दिखाया गया था। वहां पुलिस की वर्दी पहने लोग और अधिकारी दिखाई दे रहे थे। ठगों ने नकली पहचान पत्र और सरकारी दस्तावेज भी दिखाए, जिससे पीड़ित को लगा कि वह वास्तव में किसी जांच एजेंसी से बात कर रहे हैं।

    जांच पूरी होने के बाद पैसा वापस

    इसके बाद पीड़ित से कहा कि वह किसी से भी इस जांच का जिक्र न करें, क्योंकि मामला गोपनीय है। उन्हें मोबाइल फोन चालू रखने और वीडियो काल पर बने रहने के लिए कहा। इस दौरान साइबर ठगों ने उन्हें मानसिक रूप से इतना डराया कि उन्होंने हर निर्देश का पालन करना शुरू कर दिया।

    खबरें और भी

    ठगों ने पीड़ित से उनके सभी बैंक खातों, एफडी, बचत और अन्य निवेश की जानकारी मांगी। फिर कहा गया कि खातों की वेरिफिकेशन करनी होगी और इसके लिए पूरी राशि एक सरकारी सुरक्षित खाते में भेजनी पड़ेगी। भरोसा दिया कि जांच पूरी होने के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा।

    गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के डर से पीड़ित ने अलग-अलग किस्तों में कुल 22 लाख रुपये बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। रकम भेजने के बाद ठगों ने कुछ समय तक संपर्क बनाए रखा, लेकिन बाद में सभी नंबर बंद हो गए। तब पीड़ित को अहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने पुलिस को शिकायत दी।

    क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?

    डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराधियों का लोगों को डराकर पैसे ऐंठने का तरीका है। ठग खुद को सीबीआइ, ईडी, पुलिस, आरबीआइ, ट्राई, कस्टम या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर कहते हैं कि आपका नाम किसी अपराध, मनी लांड्रिंग, ड्रग्स या पार्सल घोटाले में आया है।

    फिर वीडियो काल के जरिए नकली पुलिस स्टेशन या कार्यालय दिखाकर लोगों को मानसिक दबाव में लाया जाता है और उनसे पैसे ट्रांसफर करा लिए जाते हैं।

    इस तरह करें बचाव

    किसी भी सरकारी एजेंसी का अधिकारी फोन या वीडियो काल पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहता।
    किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते, ओटीपी, नेट बैंकिंग या जमा पूंजी की जानकारी साझा न करें।

    यदि कोई गिरफ्तारी, मनी लांड्रिंग या पार्सल के नाम पर धमकाए तो काल काट दें और पुलिस से संपर्क करें।
    किसी भी दबाव में आकर बैंक खाते में रकम ट्रांसफर न करें। परिवार के सदस्यों से बात करें। साइबर ठग अकसर पीड़ित को किसी से बात न करने की हिदायत देते हैं ताकि उनका झूठ पकड़ा न जाए।

    संदिग्ध काल या साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। जितनी जल्दी शिकायत होगी, रकम वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक हो सकती है।

    डिजिटल अरेस्ट के मामलों में ठग सबसे पहले डर पैदा करते हैं, फिर पीड़ित को मानसिक रूप से अलग-थलग कर देते हैं और अंत में जांच या वेरिफिकेशन के नाम पर पूरी जमा पूंजी अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते हैं। इसलिए सतर्कता, जानकारी और समय रहते शिकायत ही इस तरह की ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

    - पलविंदर सिंह, साइबर एक्सपर्ट