पाकिस्तान से भारत आकर शुरू की नई जिंदगी, चुनाव हारने से लेकर पंजाब में मंत्री तक; ऐसा रहा भगत चुन्नी लाल का सियासी सफर
पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता भगत चुन्नी लाल का 93 वर्ष की आयु में निधन ...और पढ़ें

पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल (जागरण ग्राफिक्स)
HighLights
पूर्व कैबिनेट मंत्री भगत चुन्नी लाल का 93 वर्ष की आयु में निधन
सियालकोट से विस्थापित होकर जालंधर में राजनीतिक करियर बनाया
पंजाब विधानसभा के उपाध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री भी रहे
डिजिटल डेस्क, जालंधर। पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और दिग्गज भारतीय जनता पार्टी नेता भगत चुन्नी लाल का 93 साल की आयु में गुरुवार सुबह निधन हो गया।
वह वर्तमान में पंजाब के बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत के पिता थे। मोहिंदर भगत ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने पिता के निधन की जानकारी शेयर की। उनके निधन पर प्रदेश की विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संस्थाओं ने गहरा शोक जताया है।

कैसा रहा शुरुआती जीवन?
भगत चुन्नी लाल का जन्म 1 दिसंबर 1932 को सियालकोट (तत्कालीन ब्रिटिश भारत, अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनके पिता का नाम महंगा राम और मात का नाम रुक्मणी देवी था। देश के बंटवारे के समय वह पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए और पंजाब के जालंधर में बसकर एक नई शुरुआत की।
भगत चुन्नी लाल ने 10वीं क्लास तक पढ़ाई की। और फिर इसके बाद व्यवसाय में कदम रखा। उन्होंने कारोबार में अपनी अलग पहचान बनाई और शीला स्पोर्ट्स के नाम से कारोबार स्थापित कर पैसा और नाम दोनों कमाया।
कैसा रहा सियासी सफर?
पूर्व कैबिनेट मंत्री भगत चु्न्नी लाल ने पहली बार साल 1985 में जालंधर दक्षिण सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। लेकिन इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
इसके बाद वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। उन्होंने साल 1997 और साल 2007 में बीजेपी के टिकट पर जालंधर दक्षिण सीट से जीत हासिल की। परिसीमन के बाद जब यह सीट जालंधर पश्चिम बनी, तब उन्होंने 2012 के चुनाव में भी शानदार जीत दर्ज की।
साल 2011 में सतपाल गोसाईं के इस्तीफे के बाद उन्हें पंजाब विधानसभा का उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) चुना गया।
बादल सरकार में रहे मंत्री
पंजाब में अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन के दौरान वह कैबिनेट मंत्री भी रहे। साल 2012 से 2017 के बीच उन्होंने वन एवं वन्यजीव, श्रम और अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। साल 2017 में उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया।
