यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 04, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद लुधियाना-रोपड़ हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण, किसानों को मुआवजे का वादा
लुधियाना में हाई कोर्ट के आदेश के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को प्रोजेक्टों के लिए जमीन मिलनी शुरू हो गई है। लाडोवाल से रोपड़ तक बनने वाले राष् ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, लुधियाना। हाई कोर्ट के आदेश बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को प्रोजेक्टों के लिए जमीन मिलनी शुरू हो गई है। सिविल प्रशासन ने रविवार को पुलिस बल के साथ दो मुख्य प्रोजेक्टों के लिए जगह अधिग्रहित की। जिला प्रशासन खेतों में फसल की कटाई का इंतजार कर रहा था।
जैसे ही कटाई का काम पूरा हुआ कार्रवाई की गई है। लाडोवाल से रोपड़ तक बनने जा रहे राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए जमीन एक्वायर करने के लिए भारी संख्या में पुलिस प्रशासन बल पहुंचा और करीब 23 किमी लंबे मार्ग की जमीन को किसानों के कब्जे से मुक्त कराया।
किसी भी प्रकार का नहीं हुआ विरोध
इस दौरान माछीवाड़ा सब-तहसील के गांव गुरुगढ़ से बहिलोलपुर तक 10.5 किमी लंबे हाईवे के लिए भूमि एक्वायर की प्रक्रिया सुबह सात बजे शुरू की गई। खन्ना के एसपी पवनजीत और डीएसपी समराला तरलोचन सिंह के नेतृत्व में सैंकड़ों पुलिस कर्मचारी प्रशासन को भूमि एक्वायर में मदद करने के लिए पहुंचे।
एसडीएम रजनीश अरोड़ा के नेतृत्व में माल विभाग के अधिकारियों की देखरेख में राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कर रही कंपनी को किसानों की जमीन पर कब्जा दिलाया गया। एसडीएम ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए इस भूमि को एक्वायर करने का कार्य शांतिपूर्वक पूरा हो गया। किसी भी प्रकार का कोई विरोध नहीं हुआ और किसानों ने सहयोग दिया।
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भारत माला प्रोजेक्ट के लिए 40 एकड़ जमीन पर लिया कब्जा
भारत माला परियोजना के तहत बनाए जा रहे राष्ट्रीय राजमार्ग को लेकर स्थानीय प्रशासन ने पुलिस की मदद से अधिग्रहित जमीन पर कब्जा लेने के लिए तड़के जगराओं के गांव रामगढ़ सीविया को चारों तरफ से घेर लिया। विभिन्न गांवों से किसान नेताओं को सुबह-सुबह ही हिरासत में ले लिया गया।
इस दौरान अधिग्रहित 40 एकड़ जमीन पर कब्जा लिया और बुलडोजर चलाकर जमीन को समतल किया। एसडीएम रायकोट गुरवीर सिंह कोहली और एसपी हरजिंदर सिंह के नेतृत्व में गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। हालांकि पुलिस को किसान संगठनों की ओर से विरोध का सामना नहीं करना पड़ा।
अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि जमीन के मालिक किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। दूसरी ओर किसानों का आरोप है कि अधिकांश किसानों को अधिग्रहित भूमि का मुआवजा भी नहीं मिला।