पठानकोट में एनओसी के इंतजार में अटका धुस्सी बांध का काम, रावी किनारे बसे 35 गांवों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
रावी दरिया में पिछले वर्ष आई बाढ़ से टूटा धुस्सी बांध अब तक नहीं बन पाया है। बरसात नजदीक आने से 35 से अधिक गांवों पर फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। ग् ...और पढ़ें

बांध के बारे में जानकारी देते हुए स्थानीय लोग।
HighLights
पिछले साल रावी बाढ़ से धुस्सी बांध क्षतिग्रस्त हुआ।
वन्यजीव विभाग की एनओसी के कारण काम रुका।
35 गांवों पर फिर से बाढ़ का खतरा मंडराया।
दीपक कुमार, बमियाल (पठानकोट)। पिछले वर्ष रावी दरिया में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान पठानकोट में बमियाल के अंतर्गत आते गांव पम्मा से अड्डा कोलिया तक बह गया धुस्सी बांध आज भी अपनी पुनर्स्थापना का इंतजार कर रहा है। बरसात का मौसम फिर से दस्तक देने वाला है, लेकिन बांध निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया है।
ऐसे में सीमांत क्षेत्र के करीब 35 गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है और उन्हें एक बार फिर बाढ़ जैसे हालात बनने का डर सता रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष आई बाढ़ ने पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई थी। रावी दरिया के तेज बहाव ने गांव पम्मा के सामने बने धुस्सी बांध को तोड़ दिया था।
देखते ही देखते गांव पम्मा से अड्डा कोलिया तक करीब एक किलोमीटर क्षेत्र में बांध पूरी तरह बह गया। इसके बाद बाढ़ का पानी मंड क्षेत्र की ओर फैल गया और दर्जनों गांव जलमग्न हो गए थे।
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बीते साल बाढ़ ने मचाई थी तबाही
बाढ़ के दौरान कई मकान, दुकानें और कृषि भूमि पानी की चपेट में आ गई थीं। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, पुलिस और सेना को राहत एवं बचाव अभियान चलाना पड़ा था। उस दौरान एक गुर्जर परिवार के चार सदस्य भी पानी के तेज बहाव में बह गए थे। आज भी उस त्रासदी के निशान इलाके में साफ दिखाई देते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि एक वर्ष बीत जाने के बावजूद प्रशासन और संबंधित विभाग स्थायी समाधान नहीं निकाल पाए हैं। लोगों का कहना है कि बरसात शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, लेकिन टूटा हुआ बांध अभी भी अपनी जगह पर नहीं बन पाया। यदि इस बार भी दरिया में जलस्तर बढ़ा तो हालात पहले से ज्यादा भयावह हो सकते हैं।
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वन्यजीव विभाग से NOC की आवश्यकता
जानकारी के अनुसार जिस स्थान पर बांध टूटा था, वह कथलौर वन्यजीव अभयारण्य के नजदीक आता है। यहां एक किलोमीटर के दायरे में खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध है। बांध निर्माण के लिए दरिया से पत्थर निकालने की आवश्यकता है, जिसके लिए वन्यजीव विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है। यही अनुमति अभी तक नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
ग्राउंड स्तर पर स्थिति यह है कि जहां पहले धुस्सी बांध मौजूद था, वहां अब दरिया का बहाव है। अस्थायी सुरक्षा के तौर पर पिछले वर्ष मिट्टी की बोरियों से बनाया गया बांध भी अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। कई स्थानों पर मिट्टी की बोरियां बिखर चुकी हैं और दरिया में समा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तेज बारिश की स्थिति में यह अस्थायी व्यवस्था भी टिक नहीं पाएगी।
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35 के करीब गांवों पर बाढ़ का खतरा
स्थानीय निवासी इंद्रजीत सिंह, हरपाल सिंह, रवि कुमार, सुरेंद्र सिंह और हरभजन दास सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बरसात शुरू होने से पहले बांध निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो 35 से 50 गांवों तक बाढ़ का खतरा पहुंच सकता है।
उधर, संबंधित विभाग के उपमंडल अधिकारी पंकज वाली ने बताया कि बांध निर्माण के लिए आवश्यक पत्थर दरिया से निकालने की अनुमति अभी प्राप्त नहीं हुई है। वन्यजीव विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही कार्य शुरू किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से तैयारी पूरी है, लेकिन अनुमति प्रक्रिया के कारण काम फिलहाल लंबित है।