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    पाकिस्तान के जाल में कौन! देश में जासूसी के लिए किसे बना रहा निशाना? गिरफ्तार एजेंटों ने किए चौंकाने वाले खुलासे

    Updated: Thu, 28 May 2026 07:00 PM (GMT+05:30)

    पठानकोट में सेना और अर्धसैनिक बलों की जानकारी पाकिस्तान की आईएसआई को देने के आरोप में बलजिंदर सिंह और तरनप्रीत सिंह को प्रोडक्शन वारंट पर लाया गया है। ...और पढ़ें

    फोटो एआई द्वारा बनाई गई है।

    फोटो एआई द्वारा बनाई गई है।

    HighLights

    1. आरोपी बलजिंदर, तरनप्रीत आईएसआई को देते थे जानकारी

    2. नशे की लत के कारण जासूसी के दलदल में फंसे

    3. दो साल से पाकिस्तानी आईएसआई के संपर्क में थे

    राजकुमार चौधरी, पठानकोट। जम्मू राष्ट्रीय मार्ग पर सड़क के किनारे एक दुकान पर सीसीटीवी कैमरा लगाकर सेना व अर्धसैनिक बलों की पाकिस्तान आईएसआई एजेंटों को सूचना देने के आरोप में काबू आरोपितों की ओर से जांच के दौरान पुलिस के समक्ष कई अहम खुलासे करने शुरू कर दिये हैं।

    मामले में संलिप्त आरोपित बलजिंदर सिंह उर्फ विक्की और तरनप्रीत सिंह उर्फ तन्नू निवासी गांव संदलपुर थाना दोरांगला जिला गुरदासपुर को पठानकोट पुलिस प्रोडक्शन वारंट पर पूछताछ के लिए लेकर आई है। पुलिस ने जांच में पाया कि सभी आरोपित नशे के आदी है और नशा ही इन्हें जासूसी के राह पर लेकर आया है। आरोपियों को पैसे मिलने के बाद वे नशे की पूर्ति करते।

    इन्हें दुबई में बैठे पाकिस्तानी हेंडलर अपने संपर्क में लेकर दिशा निर्देश जारी करते थे। जांच के दौरान पता चला है कि करीब दो साल पहले उक्त दोनों आरोपित पाकिस्तानी आईएसआई के संपर्क में आए थे। इसके बाद इन्होंने बलजीत सिंह उर्फ बीतू निवासी पठानकोट को भी अपने साथ पैसों का झांसा देकर अपने साथ मिला लिया।

    संवेदनशील मूवमेंट पर रखते हैं नजर

    जांच में पता चला है कि पाकिस्तानी आईएसआई एजेंटों की ओर से इनकी ड्यूटी लगाई गई थी कि वे सिर्फ सेना और अर्धसैनिक बलों की संवेदनशील मूवमेंट पर नजर रखे तथा उसे पाकिस्तान आइएसआइ तक पहुंचाए।

    खबरें और भी

    सूत्रों के अनुसार आरोपितों की ओर से खुलासे में यह भी सामने आया है कि जैसे जैसे वे पाकिस्तान आईएसआई एजेंट को उनके द्वारा दिए काम को पूरा करते तो उसके बदले में उन्हें पाकिस्तान की ओर से किसी न किसी जगह पर पैसे भेज दिये जाते। ये पैसे कई-कई किसी सुनसान जगह पर मिलते तो कभी-कभी एजेंटो से संपर्क करके किसी दुकानदार के बैंक खातों में डलवा दिये जाते।

    जांच में जुटी पुलिस टीम

    हालांकि, दुकानदार को इसका पता नहीं होता था कि यह पैसों की फंडिंग कहा से हो रही है। सूत्रों से पता चला है कि जेल में बंद होने के बावजूद भी आरोपित पाकिस्तानी आईएसआई एजेंटों के संपर्क में रहे जिसकी जांच पुलिस की ओर से की जा रही है तथा पता लगाया जा रहा है कि आखिरकार इनके पास जेल के अंदर मोबाइल फोन कहा से आए। जानकारी के अनुसार पठानकोट पुलिस अभी तक सभी आरोपियों से रिमांड दौरान पूछताछ कर रही है और इसके बाद सेना भी आरोपियों को पूछताछ करेगी।