Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पटियाला में 400 फीट ऊंचे टावर पर चढ़े गुरजीत को सुरक्षित उतारा, 18 महीने से कर रहे थे प्रदर्शन; क्या थी उनकी मांग?

    Updated: Sat, 25 Apr 2026 06:26 PM (IST)

    भाई गुरजीत सिंह खालसा को 18 महीने बाद 400 फीट ऊंचे टावर से सुरक्षित नीचे उतारा गया। वे धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून की मांग को लेकर ट ...और पढ़ें

    नीचे उतरते ही गुरजीत ने धरती माता को किया प्रणाम। फोटो जागरण

    नीचे उतरते ही गुरजीत ने धरती माता को किया प्रणाम। फोटो जागरण

    HighLights

    1. भाई गुरजीत सिंह खालसा 18 माह बाद टावर से उतरे।

    2. धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून की मांग।

    3. प्रशासन ने दो घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन से सुरक्षित उतारा।

    जागरण संवाददाता, पटियाला। धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग को लेकर 18 महीनों से अधिक समय से 400 फीट ऊंचे टावर पर डटे भाई गुरजीत सिंह खालसा को शुक्रवार सुबह प्रशासन ने सुरक्षित नीचे उतार लिया। इस रेस्क्यू आपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने में करीब दो घंटे का समय लगा।

    बचाव अभियान के दौरान पंजाब फायर सर्विस की प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम ने टर्न टेबल लैडर (टीटीएल) के माध्यम से लगभग 180 फीट की ऊंचाई तक पहुंच बनाई। इसके बाद टीम ने हार्नेस, पुली और रस्सियों की मदद से करीब 150 फीट ऊपर स्थित भाई खालसा तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित किया।

    फिर सावधानीपूर्वक उन्हें सीढ़ी और रस्सी की सहायता से लगभग 125 फीट नीचे उतारकर फायर ब्रिगेड की हाइड्रोलिक केबिन में शिफ्ट किया गया। इस अभियान के लिए नगर निगम लुधियाना से विशेष टर्न टेबल लैडर मंगवाई गई थी। बता दें कि संबंधित बीएसएनएल टावर चालू स्थिति में है।

    मांगों को मजबूती मिली और सरकार तक आवाज पहुंची

    नीचे उतरते ही भाई गुरजीत सिंह खालसा ने सबसे पहले धरती माता को नमन किया और उसके बाद कहा अस्सीं जीत गए ओए कहते हुए बोले सो निहाल, सत श्री अकाल के जयकारे लगाए।

    खबरें और भी

    उन्होंने समाना की एसडीएम रिचा गोयल, डीएसपी फतेह सिंह बराड़ और पटियाला प्रशासन का आभार जताया। इसके बाद उनकी मेडिकल जांच कर उन्हें समाना के मोहल्ला अमानगढ़ स्थित उनकी मौसी के घर ले जाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग उनसे मिलने पहुंचे।

    gurjeet

    भाई खालसा ने कहा कि भले ही उनका संघर्ष 18 महीनों से जारी था, लेकिन 24 फरवरी 2026 को संगत द्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर चौक पर धरना देने के बाद ही उनकी मांगों को मजबूती मिली और सरकार तक आवाज पहुंची।

    उन्होंने बताया कि टावर पर रहते हुए उन्होंने अधिकतर समय वाहेगुरु के नाम का जाप करते हुए बिताया। इसके उपरांत वह बाबा बंदा सिंह बहादुर चौक पहुंचे, जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष माथा टेककर संगत का धन्यवाद किया।

    इन उपकरणों का हुआ इस्तेमाल

    रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सब फायर अधिकारी रमन कुमार के नेतृत्व में फायरमैन कमलजीत सिंह, गगनदीप सिंह, गुरचरण सिंह, अमनदीप सिंह और कृष्ण कुमार ने फुल बॉडी हार्नेस, स्ट्रेचर, पुली, रस्सियां, नॉन-स्लिप सेफ्टी ग्लव्स, हाई वोल्टेज सेफ्टी सिस्टम और वायरलेस सेट का उपयोग किया। वहीं टीटीएल ऑपरेटर रवि शंकर और अमनिंदर सिंह ने अत्याधुनिक लिफ्ट का संचालन किया।

    सेहत बिगड़ी, मौसम बदला- लेकिन हौसला कायम

    करीब 48 वर्षीय भाई गुरजीत सिंह खालसा, जो समाना के नजदीकी गांव खेड़ी नगाइयां के निवासी हैं, वर्ष 2015 में सामने आई धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी की घटनाओं से गहरे तौर पर आहत हुए थे। जिसके बाद करीब 18 माह तक टावर पर डटे रहे।

    टावर पर बैठे भाई गुरजीत सिंह खालसा ने न तो खराब मौसम की परवाह की और न ही बिगड़ती सेहत की। समर्थक रस्सियों के माध्यम से उन्हें खाने-पीने का सामान ऊपर पहुंचाते रहे। प्रशासन की ओर से एहतियातन टावर के नीचे हर समय डाक्टर और एंबुलेंस तैनात रखी गई थी।

    डॉक्टरों द्वारा जांच के बाद ही भोजन सामग्री ऊपर भेजी जाती रही । हालांकि, टावर पर ही रहना उनकी सेहत के लिए चुनौती बनता जा रहा था। शौचादि की जरूरतों के लिए भी उन्हें वहीं पालीथीन लिफाफों का सहारा लेना पड़ रहा था।