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    विरासत-ए-खालसा के उद्घाटन पर जब आनंदपुर साहिब आई थीं आशा भोसले, शबद गायन से समागम को बनाया था यादगार

    Updated: Sun, 12 Apr 2026 11:10 PM (IST)

    विख्यात गायिका आशा भोसले ने 2001 में आनंदपुर साहिब का दौरा किया था, जब विरासत-ए-खालसा के पहले चरण का उद्घाटन हुआ था। तत्कालीन बादल सरकार के निमंत्रण प ...और पढ़ें

    आशा भोसले जब आई थीं पंजाब। फाइल फोटो

    आशा भोसले जब आई थीं पंजाब। फाइल फोटो

    HighLights

    1. आशा भोसले ने 2001 में आनंदपुर साहिब का दौरा किया।

    2. विरासत-ए-खालसा उद्घाटन पर शबद गायन से पलों को यादगार बनाया।

    3. खालसा पंथ की धरती पर माथा टेका, खुद को धन्य समझा।

    अरुण कुमार पुरी, रूपनगर। विख्यात गायिका आशा भोसले अपने जीवन में चाहे मात्र एक बार ही जिला रूपनगर के आनंदपुर साहिब क्षेत्र में आई थीं, लेकिन उनके आनंदपुर साहिब दौरे की यादें आज भी आनंदपुर वासियों के दिलों में ताजी हैं। भोसले 2001 के दौरान उस वक्त आनंदपुर साहिब की धरती पर आई थीं, जब पंजाब में स्वर्गीय प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली शिअद-भाजपा गठबंधन वाली सरकार थी।

    उन दिनों आनंदपुर साहिब में विरासत-ए-खालसा का निर्माण युद्ध स्तर पर करवाया जा रहा था, क्योंकि 2002 में विधानसभा चुनाव आने वाला था। उस वक्त तत्कालीन बादल सरकार द्वारा आनन-फानन में विरासत ए खालसा के पहले फेज के उद्घाटन की घोषणा कर दी गई । नवंबर 2001 में विरासत-ए-खालसा के पहले फेज का उद्घाटन भी कर दिया गया।

    पंजाब सरकार ने विशेष निमंत्रण पर बुलाई थी

    उद्घाटन के वक्त पांचों तख्तों के जत्थेदारों के साथ श्री श्री रविशंकर सहित अनेकों संत व हस्तियां आनंदपुर साहिब पहुंची थीं, जिनमें विख्यात गायिका भोसले भी शामिल थीं, जिन्हें पंजाब सरकार द्वारा विशेष निमंत्रण पर बुलाया गया था।

    उस वक्त को यादगार बनाने के लिए आशा भोसले द्वारा एक मात्र हारमोनियम तथा तबले की संगत में मेरे साहेब मेरे साहेब तू निमानिमानी, अरदास करी प्रभु अपने आगे सुन सुन जीवां तेरी बाणी शबद का गायन करते हुए उन पलों को यादगार बना दिया था।

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    आशा भोसले ने धरती पर टेका था माथा 

    उस वक्त उनका कहना था कि आज वो इस धरती पर आकर खुद को धन्य समझ रही हैं, जिस धरती पर दशमेश पिता ने खालसा पंथ की स्थापना की तथा जिस धरती पर सिख पंथ के पांच महान तख्तों में से एक तख्त श्री केसगढ़ साहिब है। उस वक्त आशा भोसले ने इस धरती पर माथा भी टेका था।

    आज आशा भोसले चाहे इस संसार को अलविदा कह गई हैं, लेकिन उनकी आनंदपुर साहिब से जुड़ी मात्र कुछ घंटे की यादें हमेशा ताजा रहेंगी।