बेटे के लिए मां ने कोचिंग में जाकर की पढ़ाई, घर आकर पढ़ाया; अब आईआईटी में दाखिला लेगा बेटा
मां के अद्वितीय संघर्ष और समर्पण से बेटे गुंजन कुमार ने बीमारी से उबरकर आईआईटी दिल्ली में दाखिला पाया। गुंजन की मां ने ऑनलाइन क्लास अटेंड कर और कोचिंग ...और पढ़ें

दिल्ली आईआईटी।
HighLights
मां ने बेटे के सपने के लिए खुद कोचिंग में पढ़ाई की।
फेफड़ों की बीमारी से उबरकर बेटे ने आईआईटी दिल्ली में प्रवेश पाया।
मां के समर्पण से गुंजन ने जेईई एडवांस्ड में 50वीं रैंक हासिल की।
जागरण ब्यूरो, जयपुर। बेटे का सपना पूरा करने के लिए एक मां ने संघर्ष, समर्पण और वात्सल्य का अनुपम उदाहरण पेश किया है। हर साल देश के अलग-अलग राज्यों से लाखों छात्र आईआईटी में पढ़ने का सपना लेकर कोटा पहुंचते हैं। कुछ ऐसा ही सपना तीन साल पहले बिहार के सीतामढ़ी निवासी गुंजन कुमार ने भी देखा था।
कोटा के एक निजी कोचिंग संस्थान में वह तीन साल से तैयारी कर रहा था। अक्टूबर 2025 तक उसकी तैयारी सही चल रही थी, लेकिन परीक्षा से करीब पांच माह पहले गुंजन के फेफड़े खराब हो गए। जांच में पता चला की उसे न्यूमोथोरैक्स बीमारी हो गई।
बीमारी के कारण वह तीन माह पूरी तरह से बिस्तर से नहीं उठ सका। सपने को नाकाम होता देखकर वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगा। बेटे की परेशानी देखकर बीएड पास मां ने करीब 15 साल बाद फिर से किताबें उठाईं। गुंजन के बिस्तर के पास बैठकर गुंजा आनलाइन क्लास में पढ़ती फिर नोट्स बनाकर बेटे को पढ़ाती थी।
जब आनलाइन क्लास से समस्या हल नहीं हो पाती तो वह स्वयं कोचिंग संस्थान भी जाती और अन्य छात्रों के साथ बैठकर पढ़ाई करती और फिर घर पहुंचकर बेटे को पढ़ाती थी। दोनों ने मिलकर कड़ी मेहनत की और पूरे पाठ को दोहराया। गुंजन धीरे-धीरे ठीक हो गया और अपनी मां के नोट्स के माध्यम से फिर से पढ़ाई करने लगा।
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मां-बेटे की मेहनत रंग लाई और अब गुंजन आईआईटी दिल्ली में कंप्यूटर सांइस ब्रांच में प्रवेश लेने जा रहा है। गुंजन ने जेईई मेन में 91.8 पर्सेंटाइल हासिल किया था। वहीं जेईई एडवांस्ड में पीडब्ल्यूडी-ओबीसी कैटेगरी में आल इंडिया रैंक 50 हासिल की।
बेटे के आईआईटी दिल्ली में प्रवेश का रास्ता साफ होने के बाद गुंजा ने कहा कि मेरे बेटे का सपना ही मेरा सपना है। यह मेरे जीवन का सबसे सुखद पल है। बता दें कि 70 प्रतिशत से अधिक दृष्टि प्रभावित होने के कारण गुंजन को 9.5 नंबर का चश्मा लगाना पड़ता है। गुंजन के पिता राजनारायण प्रसाद सीमा सड़क संगठन में इंजीनियर हैं।
गुंजन की सफलता के बाद अब उसका छोटा भाई भी कोटा में तैयारी कर रहा है। वहीं, गुंजन ने कहा कि मां नहीं होती तो मैं यह सफलता हासिल नहीं पाता। परिस्थितियां हमेशा हमारे पक्ष में नहीं रहती, परीक्षा सिर्फ पढ़ाई की ही नहीं हौसले की भी होती है। बता दें कि गुंजन की मां ने विज्ञान विषय में स्नातक किया था।
न्यूमोथोरैक्स का कारण
न्यूमोथोरैक्स को आम भाषा में फेफड़े का सिकुड़ना भी कहा जाता है। इस बीमारी में फेफड़े और छाती की दीवार के बीच के खाली स्थान में हवा भर जाती है। यह हवा बाहर से फेफड़ों पर अत्यधिक दबाव बनाती है, जिससे फेफड़े आंशिक या पूर्ण रूप से सिकुड़ जाते हैं। यह बीमारी बाहरी चोट या भारी वजन उठाने से हो सकती है।