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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 30, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Jaipur: जयपुर बम धमाका मामले में इस दिन आएगा फैसला, दो आरोपित अभी जेल में; दो जमानत पर बाहर

    Updated: Sun, 30 Mar 2025 02:00 AM (IST)

    राजस्थान के जयपुर में करीब 17 साल पहले हुए सीरियल बम धमाकों के दौरान चांदपोल स्थित राम मंदिर के पास मिले बम के मामले में अब चार अप्रैल को फैसला आएगा। ...और पढ़ें

    यपुर बम धमाका मामले में इस दिन आएगा फैसला, दो आरोपित अभी जेल में (सांकेतिक तस्वीर)
    यपुर बम धमाका मामले में इस दिन आएगा फैसला, दो आरोपित अभी जेल में (सांकेतिक तस्वीर)

    HighLights

    1. राम मंदिर के पास मिले बम के मामले में दो आरोपित अभी जेल में, दो जमानत पर बाहर
    2. उच्च न्यायालय ने सजा को रद करते हुए सभी आरोपितों को बरी कर दिया था

     जागरण संवाददाता, जयपुर। जयपुर में करीब 17 साल पहले हुए सीरियल बम धमाकों के दौरान चांदपोल स्थित राम मंदिर के पास मिले बम के मामले में अब चार अप्रैल को फैसला आएगा। इस मामले में चार आरोपित हैं, जिनमें दो सैफुर्रहमान और मोहम्मद सैफ जयपुर सेंट्रल जेल में बंद है, जबकि मोहम्मद सरवर आजमी व शाहबाज अहमद जमानत पर बाहर हैं।

    दो आरोपित अभी जेल में

    विशेष अदालत ने दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद शनिवार को फैसला सुनाने का दिन तय किया था। इसके पहले शहर में हुए धमाकों के आठ मामलो में करीब साढ़े पांच साल पहले आरोपितों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन उच्च न्यायालय ने सजा को रद करते हुए सभी आरोपितों को बरी कर दिया था।

    इसके खिलाफ राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी, जो लंबित है। बता दें कि जयपुर में 13 मई 2008 को आठ सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे। करीब 11 साल बाद 20 दिसंबर, 2019 को विशेष न्यायालय ने सैफुर्रहमान, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर आजमी और एक अन्य नाबालिग को फांसी की सजा सुनाई थी।

    एक आरोपित बरी, बाद में पकड़ा

    एक आरोपित शाहबाज अहमद को बरी कर दिया गया था। इसके बाद एटीएस ने जिंदा बम मामले में सभी आरोपितों को 25 दिसंबर, 2019 को जेल से गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन उच्च न्यायालय ने 29 मार्च, 2023 को विशेष न्यायालय का फैसला पलटते हुए सभी को बरी कर दिया था।

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    एटीएस ने पूरक चार्जशीट पेश की थी

    उच्च न्यायालय ने जांच एजेंसियों की कमियों को उजागर किया था। फिर एटीएस ने पूरक चार्जशीट पेश की थी, जिसमें तीन नए गवाह शामिल किए थे।