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    कोटा सरकारी अस्पताल में सी-सेक्शन के बाद 4 महिलाओं की मौत, 6 की हालत गंभीर

    Updated: Tue, 12 May 2026 10:51 PM (IST)

    राजस्थान के कोटा स्थित सरकारी अस्पतालों में सी-सेक्शन के बाद महिलाओं की लगातार मौतें स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रही हैं। पिछले एक सप्ताह में ...और पढ़ें

    कोटा सरकारी अस्पताल में सी-सेक्शन के बाद 4 महिलाओं का मौत।

    कोटा सरकारी अस्पताल में सी-सेक्शन के बाद 4 महिलाओं का मौत।

    HighLights

    1. कोटा में एक सप्ताह में 4 महिलाओं की मौत

    2. सी-सेक्शन ऑपरेशन के बाद संक्रमण से बिगड़ी हालत

    3. अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राजस्थान के कोटा स्थित सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (NMCH) में सोमवार को एक और महिला की मौत हो गई, जिसके बाद पिछले एक सप्ताह में सी-सेक्शन ऑपरेशन के बाद संक्रमण और जटिलताओं से मरने वाली महिलाओं की संख्या बढ़कर चार हो गई है।

    ताजा मामला 30 वर्षीय पिंकी महावर का है, जिनकी सोमवार तड़के इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्हें जेके लोन अस्पताल से गंभीर हालत में NMCH रेफर किया गया था।

    हालत बिगड़ने के बाद रेफर किया गया

    पिंकी के पति चंद्र प्रकाश ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी को तब रेफर किया गया जब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो चुकी थी।

    चंद्र प्रकाश ने बताया, "रविवार रात करीब 8:30 बजे डॉक्टरों ने उन्हें रेफर किया। मेडिकल स्टाफ उन्हें जेके लोन अस्पताल के पिछले गेट से एंबुलेंस में लेकर NMCH भेजा। वहां सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में इलाज के दौरान दो घंटे बाद उनकी मौत हो गई।"

    उन्होंने बताया कि 7 मई को उन्होंने अपनी गर्भवती पत्नी को जेके लोन अस्पताल में भर्ती कराया था। बच्चा उल्टी स्थिति (ब्रीच पोजिशन) में था, इसलिए उसी रात इमरजेंसी सी-सेक्शन करना पड़ा।

    ऑपरेशन के बाद बिगड़ी तबीयत

    परिवार के मुताबिक, ऑपरेशन सफल रहा और बच्चे का जन्म सुरक्षित हुआ, लेकिन अगले ही दिन पिंकी की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी।

    चंद्र प्रकाश ने कहा, "डॉक्टरों ने बताया कि गर्भाशय में संक्रमण हो गया है और उसे निकालना पड़ेगा। पहले ऑपरेशन के सिर्फ 15 घंटे बाद दूसरा ऑपरेशन किया गया।"

    निकाला गया गर्भाशय बॉक्स में छोड़ दिया

    परिवार ने अस्पताल स्टाफ पर संवेदनहीनता का भी आरोप लगाया। चंद्र प्रकाश के अनुसार, "ऑपरेशन के बाद निकाला गया गर्भाशय एक बॉक्स में रखकर पिंकी के बेड के पास टेबल पर छोड़ दिया गया। स्टाफ ने कहा था कि इसे जांच के लिए भेजा जाएगा, लेकिन वह बॉक्स वहीं पड़ा रहा।"

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    इस घटना के बाद परिवार और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान परिवार ने गर्भाशय वाला बॉक्स भी वहां रख दिया और कार्रवाई की मांग करते हुए पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया।

    अस्पताल प्रशासन की सफाई

    NMCH के प्रिंसिपल डॉ. निलेश जैन ने कहा कि पिंकी महावर शुरू से ही हाई-रिस्क मरीज थीं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने जेके लोन अस्पताल की परिस्थितियों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो पूरे मामले की जांच कर रही है।

    एक हफ्ते में चार मौतें

    इससे पहले भी तीन महिलाओं की मौत हो चुकी है, जिनमें, पायल (26 वर्ष), ज्योति नायक (19 वर्ष), प्रिया महावर (22 वर्ष) शामिल हैं। प्रिया महावर की रविवार को मौत हुई थी। हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि उनकी मौत पोस्ट-सर्जिकल संक्रमण से नहीं, बल्कि हृदय संबंधी जटिलता से हुई।

    6 महिलाओं की हालत अब भी गंभीर

    फिलहाल NMCH के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भर्ती छह अन्य महिलाओं की हालत गंभीर बनी हुई है। सभी का हाल ही में सी-सेक्शन हुआ था। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने सरकारी अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण, ऑपरेशन थिएटर की स्वच्छता और प्रसवोत्तर देखभाल की व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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