सिर्फ व्रत रखना काफी नहीं, पारण में की गई ये गलती कर सकती है आपका अपरा एकादशी व्रत निष्फल
अपरा एकादशी का व्रत भगवान श्रीहरि की अपार कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग है, जो अनजाने में हुए पापों और प्रेत योनि से भी मुक्ति दिलाता है। ...और पढ़ें

अपरा एकादशी व्रत का पारण (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए एकादशी व्रत का पारण
भगवान विष्णु की कृपा के लिए जरूर अर्पित करें तुलसी
हरि वासर से बचें और द्वादशी तिथि में ही करें पारण
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज यानी 13 मई को एकादशी पर अपरा एकादशी का व्रत किया जाएगा। यदि आप पूरी श्रद्धा, शुद्ध आचरण और इन नियमों का पालन करते हुए यह व्रत करते हैं, तो आपके जीवन की सभी आर्थिक और मानसिक परेशानियां दूर हो जाती हैं। व्रत के साथ-साथ सही तरीके से उसका पारण करना यानी व्रत खोलना भी बहुत जरूरी है, जिससे भगवान विष्णु आप पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। चलिए जानते हैं अपरा एकादशी के पारण का समय और विधि।
अपरा एकादशी पारण का मुहूर्त
- पारण (व्रत तोड़ने का) समय - सुबह 5 बजकर 31 मिनट से सुबह 8 बजकर 14 मिनट तक (14 मई)
- पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर
इस विधि से करें पारण
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल जी की पूजा करें।
- भोग के रूप में माखन-मिश्री, पंजीरी आदि अर्पित करें और उसमें तुलसी दल डालें।
- पारण में तुलसी दल ग्रहण करना सबसे उत्तम माना जाता है। आप भगवान को चढ़ाया गया तुलसी दल खाकर व्रत खोल सकते हैं।
- पारण के दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं या सूखे अनाज (आटा, चावल, दाल), फल, या दक्षिणा दान करें।
करें इन मंत्रों का जप
एकादशी व्रत के पारण के दौरान आप इन मंत्रों का जप कर सकते हैं, जिससे आपको प्रभु श्रीहरि और मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है।
1. 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
2. ॐ विष्णवे नमः
3. श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि
4. भगवान विष्णु गायत्री मंत्र - ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात:

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ध्यान रखें ये बातें
- एकादशी व्रत का समापन यानी अगले दिन द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद किया जाता है, जिसे 'पारण' कहते हैं।
- एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि के भीतर शुभ मुहूर्त में ही करें।
- हरि वासर (द्वादशी तिथि की पहली एक-चौथाई अवधि) के दौरान व्रत खोलने से बचना चाहिए।
- एकादशी के पारण में चावल का उपयोग शुभ माना जाता है।
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