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आज है देवशयनी एकादशी 2026, जानिए भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने का धार्मिक महत्व

Published: Fri, 24 Jul 2026 02:30 PM (IST)Updated: Sat, 25 Jul 2026 10:08 AM (IST)

आज 25 जुलाई 2026, शनिवार देवशयनी एकादशी की तिथि के साथ चातुर्मास की भी शुरुआत हो चुकी है। आज से ...और पढ़ें

देवशयनी एकादशी 2026

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जुलाई 2026 के आखिरी सप्ताह में चातुर्मास की शुरुआत होने जा रही है, इसके बाद आगे आने वाले 4 महीने की लंबी अवधि के दौरान किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु 4 महीनों के लिए क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान पृथ्वी का संपूर्ण कार्यभार महादेव संभालते हैं।

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी इस साल 25 जुलाई, 2026 शनिवार के दिन है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु आने वाले 4 महीने के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा के लिए चले जाते हैं।

देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व 

देवशयनी एकादशी केवल भगवान के सोने का दिन नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मनुष्य को विश्राम और आत्ममंथन का संदेश देती है। जब जगत के स्वामी ठहरते हैं, तो हमें भी अपनी भागदौड़ रोककर भक्ति में लीन होना चाहिए।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष तिथि का संबंध भगवान विष्णु के एक महान युद्ध और उसके बाद विश्राम की कथा से भी जुड़ा है। माना जाता है कि, भगवान विष्णु शंखासुर नामक दैत्य का वध करने के बाद थककर चार महीने के लिए क्षीरसागर में सो जाते हैं।

भगवान के इस शयन काल को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है, जिसके बाद से पूरे चार महीनों के लिए सृष्टि के संचालन की गति बदल जाती है और सांसारिक कार्यों पर विराम लग जाता है।

वैज्ञानिक नजरिए से भी क्यों खास है देवशयनी एकादशी?

धार्मिक कथाओं के साथ-साथ इस समय का एक बहुत बड़ा मौसमी महत्व भी बताया गया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह वर्षा ऋतु का समय होता है, जब वातावरण में नमी बढ़ने के कारण कई प्रकार की संक्रामक बीमारियां तेजी से बढ़ती हैं।

इस मौसम में शरीर की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, इसलिए इन चार महीनों में व्रत रखने और बेहद संयमित जीवन जीने की सलाह दी जाती है ताकि स्वास्थ्य ठीक रहे।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।