Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    क्या बीमारी या दवाइयों के बीच रखना चाहिए एकादशी व्रत? जानें क्या कहते हैं हमारे शास्त्र

    Updated: Tue, 21 Apr 2026 10:29 AM (IST)

    यदि आप बीमार हैं या नियमित दवा लेते हैं, तो इस दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखते हुए आप एकादशी व्रत का पूरा फल पा सकते हैं। ...और पढ़ें

    एकादशी व्रत में दवा लेना शास्त्रों के अनुसार क्या सही है? (Picture Credit: Freepik) (AI Image)

    एकादशी व्रत में दवा लेना शास्त्रों के अनुसार क्या सही है? (Picture Credit: Freepik) (AI Image)

    HighLights

    1. व्रत में स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना है जरूरी

    2. सभी के लिए निर्जला व्रत रखना जरूरी नहीं है

    3. भगवान की भक्ति हेतु शरीर स्वस्थ रखना जरूरी है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैशाख माह की शुक्ल एकादशी पर मोहिनी एकादशी का व्रत किया जाता है, जो इस बार 27 अप्रैल को किया जाएगा। कई लोग इस दुविधा में रहते हैं कि क्या एकादशी व्रत में दवाई ली जा सकती है। कहीं इससे व्रत खंडित तो नहीं जो जाएगा। चलिए जानते हैं कि हमारे शास्त्र इस विषय में क्या कहते हैं।

    एकादशी व्रत के लाभ

    हिंदू धर्म शास्त्रों में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है, जो हमारे शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। हर एकादशी तिथि पर व्रत रखने से साधक के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे भगवान विष्णु की अपार कृपा की प्राप्ति होती है। साथ ही इस व्रत को करने से मानसिक शांति का भी अनुभव होता है। इतना ही नहीं, भक्ति और आध्यात्मिक विकास के लिए भी एकादशी का व्रत लाभकारी माना गया है।

    ekadashi ai (2)

    (Picture Credit- AI Generated)

    क्या ले सकत हैं दवा?

    माना गया है कि अगर शरीर के साथ-साथ मन भी भक्ति में न लगे, तो केवल भूखे रहने का फल नहीं मिलता। व्रत में स्वास्थ्य की अनदेखी करना शास्त्रसम्मत नहीं है। भगवान की सेवा या भक्ति के लिए शरीर को स्वस्थ रखना जरूरी है, इसलिए यदि आवश्यक हो तो व्रत में दवाइयों का सेवन किया जा सकता है। अगर आपकी दवा भोजन के साथ लेना जरूरी है, तो ऐसे में व्रत को फलाहारी (फल, दूध) रखें और दवा के बाद कुछ हल्का ग्रहण करें।

    क्या कहते हैं शास्त्र

    बीमारी या दवाइयों के बीच एकादशी का व्रत रखना शास्त्रों के अनुसार ऐच्छिक है, अनिवार्य नहीं। अगर कोई व्यक्ति बीमार है या दवा लेने वाला है, तो ऐसे में वह व्यक्ति निर्जला न रहकर फलाहार के साथ व्रत कर सकता है। यही नियम बच्चे और गर्भवती महिलाओं और बुजुर्ग लोगों पर भी लागू होते हैं।

    खबरें और भी

    अगर व्रत के दौरान किसी व्यक्ति की स्थिति बिगड़ती है, तो ऐसे में स्वास्थ्य को प्राथमिक देते हुए, व्रत न रखना या उसे तोड़ देना ही उचित होगा। ऐसी स्थिति में आप भगवान विष्णु से क्षमा याचना करते हुए अपना व्रत खोल सकते हैं, इससे आपको कोई दोष नहीं मिलता।

    ekadashi ai (3)

    (Picture Credit- AI Generated)

    एकादशी व्रत के नियम

    • एकादशी पर तुलसी के पत्ते न तोड़ें और न ही तुलसी में जल अर्पित करें।
    • एकादशी के दिन चावल खाने की भी मनाही होती है
    • एकादशी की पूजा में भगवान विष्णु के भोग में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें। 
    • अगले दिन एकादशी व्रत का 'पारण' करें। इसके लिए सुबह जल्दी स्नान करें और भगवान विष्णु की आराधना करें व सूर्योदय के बाद व्रत तोड़ें।

    यह भी पढ़ें - ध्रुव योग के शुभ संयोग में मनेगी मोहिनी एकादशी, पढ़ें सही तारीख, पूजा मुहूर्त और पारण समय

    यह भी पढ़ें - ज्येष्ठ माह में कब है अपरा एकादशी? यहां पढ़ें तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण का समय

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।