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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 04, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Parivartini Ekadashi की पूजा से मिलते हैं चमत्कारी फायदे, अगर जान लेंगे तो करे बिना नहीं रहेंगे यह व्रत

    Updated: Wed, 04 Sep 2024 12:43 PM (IST)

    हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर एकादशी व्रत किया जाता है। पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी के ...और पढ़ें

    Lord Vishnu: भगवान विष्णु को समर्पित है एकादशी तिथि
    Lord Vishnu: भगवान विष्णु को समर्पित है एकादशी तिथि

    HighLights

    1. भाद्रपद माह की दूसरी एकादशी परिवर्तिनी एकादशी होती है।
    2. सनातन धर्म में परिवर्तिनी एकादशी का विशेष महत्व है।
    3. एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को एकादशी तिथि समर्पित है। भाद्रपद माह की परिवर्तिनी एकादशी के दिन श्रीहरि और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही श्रद्धा अनुसार गरीब लोगों में विशेष चीजों का दान करना चाहिए। इस एकादशी को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। चलिए इस लेख में जानते हैं परिवर्तिनी एकादशी (Parivartini Ekadashi 2024) के दिन पूजा और व्रत करने से साधक को प्राप्त होने वाले लाभ के बारे में।

    परिवर्तिनी एकादशी शुभ मुहूर्त

    पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी (Parivartini Ekadashi Shubh Muhurat) तिथि शनिवार 13 सितंबर को रात 10 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन रविवार 14 सितंबर को रात 08 बजकर 41 मिनट पर होगा। ऐसे में 14 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी व्रत किया जाएगा।

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    परिवर्तिनी एकादशी व्रत पारण का समय

    एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी में किया जाता है। परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण करने का शुभ मुहूर्त 15 सितंबर को सुबह 06 बजकर 06 मिनट से लेकर 08 बजकर 34 मिनट तक है।

    मिलते हैं चमत्कारी फायदे

    पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु का शयनकाल चार माह तक जारी रहता है। ऐसे में भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर प्रभु निद्रा अवस्था के दौरान करवट लेते हैं। इसलिए इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी व्रत करने से साधक को स्वर्ण दान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा जीवन में किए गए सभी पापों से मुक्ति मिलती है और उसे बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।

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    न करें इन चीजों का सेवन

    एकादशी के दिन चावल का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा मांस, शराब, लहसुन और प्याज आदि के सेवन से दूरी बनाकर रखना चाहिए। एकादशी व्रत के भोजन में साधारण नमक और लाल मिर्च का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।