पहली बार रखने जा रहे हैं मोहिनी एकादशी का व्रत? तो पढ़ें ये 3 जरूरी नियम
मोहिनी एकादशी का व्रत 27 अप्रैल को रखा जाएगा। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा और मनोकामना पूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।

मोहिनी एकादशी के नियम (Picture Credit: Freepik) (AI Image)
HighLights
एकादशी व्रत से मिलती है भगवान विष्णु की कृपा
पूर्ण फल प्राप्ति के लिए जरूर रखें नियमों का ध्यान
तुलसी दल और व्रत कथा के बिना अधूरी है एकादशी की पूजा
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान विष्णु की आराधना के लिए एकादशी तिथि को एक बहुत ही पवित्र तिथि माना जाता है। इस दिन व्रत करने से न केवल भगवान विष्णु की कृपा मिलती है, बल्कि मनोकामनाओं की भी पूर्ति होती है।
पंचांग के अनुसार, वैशाख माह में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी पर मोहिनी एकादशी का व्रत किया जाता है, जो इस बार 27 अप्रैल को किया जाएगा। अगर आप पहली बार एकादशी व्रत कर रहे हैं, तो इससे जुड़े जरूरी नियमों का ध्यान जरूर रखें, ताकि आपके व्रत में कोई बाधा न आए।
इस तरह करनी चाहिए भगवान विष्णु की पूजा
- सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं और साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
- भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद पूजा-स्थल की साफ-सफाई कर गंगाजल का छिड़काव करें।
- एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें।
- विष्णु जी को पंचामृत से स्नान कराएं और चंदन, रोली और फूलों से शृंगार करें।
- नैवेद्य अर्पित करें और प्रभु श्रीहरि की प्रतिमा के समक्ष धूप और दीप जलाएं।
- श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें।
- अंत में आरती करते हुए प्रसाद सभी लोगों में बांटें।
एकादशी व्रत के जरूरी नियम
- एकादशी के दिन तुलसी में जल देने से बचना चाहिए।
- एकादशी के दिन बाल धोने, नाखून व बाल काटने की मनाही होती है।
- एकादशी के दिन चावल ग्रहण करना भी शुभ नहीं माना जाता।
- एकादशी व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें और यदि संभव हो तो जमीन पर सोएं।
- द्वादशी के दिन सुबह स्नान के बाद ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराने के बाद व्रत का पारण (व्रत खोलना) करना चाहिए।
इन कार्यों के बिना अधूरी है एकादशी की पूजा
धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु का भोग अधूरा होता है। ऐसे में एकादशी की पूजा में श्रीहरि के भोग में तुलसी दल जरूर शामिल करें। पूजा के बाद एकादशी व्रत की कथा जरूर सुननी या पढ़नी चाहिए, क्योंकि इसके बिना व्रत का पुरा फल आपको नहीं मिलता।
दिनभर भगवान विष्णु के मंत्रों जैसे ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप और कीर्तन करना चाहिए साथ ही एकादशी का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए यह भी जरूरी है कि आप मानसिक संयम रखें और किसी भी तरह का बुरा विचार अपने मन में न लाएं।
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