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निर्जला एकादशी 2026 पर रवि, शिव और सिद्ध समेत 4 योग का महासंयोग, जानें पूजा का उत्तम समय और महत्व

Published: Sun, 21 Jun 2026 06:01 PM (IST)

निर्जला एकादशी 25 जून 2026 को मनाई जाएगी, जिसमें रवि, शिव, सिद्ध योग और गुरुवार का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

निर्जला एकादशी पर 4 दुर्लभ महासंयोग (Picture Credit- AI Generated)

निर्जला एकादशी पर 4 दुर्लभ महासंयोग (Picture Credit- AI Generated)

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समय कम है?

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। एक साल में आने वाली 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत को करने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है, यही वजह है कि, लाखों भक्त इस दिन को बड़ी ही श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं।

इस साल निर्जला एकादशी 25 जून 2026 को मनाई जाएगी। इस मौके पर चार शुभ योगों का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे यह दिन पूजा, जप, तप, दान और धार्मिक अनुष्ठान के लिए खास बन जाता है।

निर्जला एकादशी 2026 डेट और समय

हिंदू पंचांग के मुताबिक, ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि 24 जून 2026 को रात 8 बजकर 9 मिनट पर आरंभ होगी, जो अगले दिन यानी 25 जून 2026 को रात 9 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी।

क्योंकि एकादशी की तिथि 25 जून को सूर्योदय के समय होगी, इस वजह से लोग गुरुवार 25 जून 2026 को निर्जला एकादशी का व्रत रखेंगे।

निर्जला एकादशी पर 4 शुभ योग

इस साल निर्जला एकादशी के मौके 4 अत्यंत पवित्र और दुर्लभ संयोग बनने जा रहे हैं, जिससे यह दिन पूजा, अर्चना, प्रार्थना और दान-पुण्य से जुड़े कार्यों के लिए खासतौर से अनुकूल है। यह चार महत्वपूर्ण संयोग इस तरह है-

  • रवि योग
  • शिव योग
  • सिद्ध योग
  • गुरुवार का दिन

इन योगों को धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है।

निर्जला एकादशी पर भद्राकाल का साय

इस साल निर्जला एकादशी पर भद्रा का साया देखने को मिलेगा। द्रिक पंचांग के मुताबिक, भद्रा नक्षत्र 25 जून 2026 को सुबह 7 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। हालांकि ज्योतिषियों के मुताबिक, इस दौरान भद्रा नक्षत्र पाताल लोक में स्थित रहेगा। इस वजह से इसे व्रत, पूजा या संबंधित अनुष्ठानों में कोई बाधा नहीं देखने को मिलेगी।

इस मतलब है कि, श्रद्धालु बिना किसी बाधा के अपनी प्रार्थनाएं, अनुष्ठान और दान-पुण्य के काम कर सकते हैं।

निर्जला एकादशी पर उपासना के लिए शुभ समय

जो भी लोग निर्जला एकादशी पर खास प्रार्थना करने की योजना बना रहे, उस दिन कई शुभ मुहूर्त रहने वाले है।

पहला मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- 4 बजकर 5 से सुबह 4 बजकर 45 मिनट तक

यह समय ध्यान, मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक अभ्यासों के लिए सबसे पवित्र मुहूर्त माना जाता है।

दूसरा मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से लेकर 12 बजकर 52 मिनट तक

यह दोनों ही मुहूर्त जरूरी धार्मिक गतिविधियों और प्रार्थनाओं के लिए काफी शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त पूरे दिन रवि योग की उपस्थिति आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए इस तारीख की महत्वता को और भी बढ़ा देती है।

निर्जला एकादशी पर पारण का समय?

व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन यानी 26 जून 2026 को अपने व्रत का पारण करेंगे।

पारण करने के लिए शुभ समय 5 बजकर 25 मिनट से लेकर 8 बजकर 13 मिनट तक

धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, निर्धारित पारणा अवधि के अंदर ही उपवास तोड़ना शुभ मान जाता है।

निर्जला एकादशी क्यों जरूरी?

भगवान विष्णु को समर्पित निर्जला एकादशी भारत वर्ष में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। देखा जाए तो परंपरागत रूप से यह व्रत बिना अन्न और पानी के रखा जाता है, इसलिए इसे निर्जला कहते हैं, जिसका मतलब बिना पानी के।

उपवास के साथ-साथ यह दिन दान-पुण्य, जरूरतमंदों को भोजन कराने, चंदा देने और भक्तिमय पूजा-अर्चना करने के लिए भी खास है। भक्तों का मानना है कि, निर्जला एकादशी के दिन निष्ठापूर्वक व्रत का पालन करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

साल 2026 में रवि योग, शिव योग, सिद्ध योग और गुरुवार के दुर्लभ संयोग के वजह से इस साल निर्जला एकादशी पवित्र व्रत रखने वालों के लिए खास रहने वाला है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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