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साल में 2 बार क्यों रखा जाता है पुत्रदा एकादशी व्रत और क्या है इसका महत्व?

Published: Thu, 20 Aug 2026 12:35 PM (IST)

पुत्रदा एकादशी का व्रत साल में दो बार (पौष और श्रावण मास में) संतान प्राप्ति और सुखी जीवन की कामना ...और पढ़ें

पुत्रदा एकादशी 2026

पुत्रदा एकादशी 2026

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत महत्व है, क्योंकि यह खास उपवास भगवान विष्णु को समर्पित होता है। यह व्रत प्रत्येक महीने में 2 बार (कृष्ण और शुक्ल पक्ष में) यानी साल में 24 बार रखा जाता है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक इस व्रत को करने से मन शुद्ध होने के साथ पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है।

लेकिन क्या आपको पता है कि, इन सभी एकादशियों में एक एकादशी ऐसी भी है, जो साल में दो बार आती है और यह पुत्रदा एकादशी है। मान्यताओं के मुताबिक, इस एकादशी में भगवान विष्णु की पूजा बाल रूप में की जाती है। ऐसे लोग जो संतान सुख की चाह रखते हैं, उन्हें यह व्रत अवश्य रखना चाहिए।

पुत्रदा एकादशी 2026 में कब?

साल में दो बार पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। एक बार पौष मास (दिसंबर से जनवरी) और दूसरी श्रावण मास (जुलाई से अगस्त)। दोनों ही व्रत संतान प्राप्ति के उद्देश्य और सुखी जीवन के लिए रखा जाता है।

इस साल पौष मास की पुत्रदा एकादशी का व्रत 10 जनवरी 2026 को रखा गया था। जबकि श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।

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श्रावण पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व

श्रावण मास में आने वाली पुत्रदा एकादशी को कई हिस्सों में पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे पापों का नाश करने वाली और पुण्य प्रदान करने वाली एकादशी बताया जाता है।

श्रावण मास में इस एकादशी का महत्व इसलिए भी और बढ़ जाता है क्योंकि इस महीने में भगवान शिव की भी पूजा होती है। ऐसे में भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को खास लाभ मिलता है।

साल में 2 बार पुत्रदा एकादशी क्यों?

एक साल में दो बार पुत्रदा एकादशी व्रत होने का मुख्य कारण यह है कि, विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में दोनों ही खास तिथियों का फल संतान प्राप्ति और संतान की सुरक्षा के लिए बताया गया है। दोनों ही एकादशियों का उद्देश्य और फल की समानता होने के कारण ही दोनों को पुत्रदा एकादशी (संतान प्रदान करने वाली) कहा जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।