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    Rama Ekadashi 2026 Date: कब और क्यों मनाई जाती है रमा एकादशी? यहां पढ़ें धार्मिक महत्व

    Updated: Mon, 02 Mar 2026 07:38 PM (IST)

    कार्तिक मास में लक्ष्मी नारायण को समर्पित रमा एकादशी का विशेष महत्व है। इस एकादशी का व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ...और पढ़ें

    Rama Ekadashi 2026: भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के उपाय

    Rama Ekadashi 2026: भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के उपाय

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कार्तिक का महीना बेहद पावन होता है। यह महीना जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस महीने में गंगा स्नान करने का विधान है। कहते हैं कि कार्तिक महीने में गंगा स्नान करने से व्यक्ति विशेष द्वारा जन्म-जन्मांतर में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

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    कार्तिक महीने में रमा और देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। आइए, रमा एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त और योग जानते हैं-

    कब मनाई जाती है रमा एकादशी? (Rama Ekadashi Religious Significance)

    हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन रमा एकादशी मनाई जाती है। यह दिन पूर्णतया लक्ष्मी नारायण जी को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर भक्ति भाव से भगवान विष्णु की पूजा (Lord Vishnu and Maa Lakshmi Puja) की जाती है। साथ ही मनचाही मुराद पाने के लिए व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने मात्र से साधक को पृथ्वी लोक पर स्वर्ग समान सुखों की प्राप्ति होती है।

    रमा एकादशी कब है?

    वैदिक पंचांग की गणना अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 04 नवंबर को दिन में 11 बजकर 03 मिनट पर होगी। वहीं, 05 नवंबर को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशीा तिथि समाप्त होगी। इस प्रकार 05 नवंबर को रमा एकादशी मनाई जाएगी।

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    रमा एकादशी पारण समय

    शनिवार 17 अक्टूबर को रमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। वहीं, 06 नवंबर को रमा एकादशी का पारण किया जाएगा। 06 नवंबर को रमा एकादशी का पारण सुबह 06 बजकर 37 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 48 मिनट के मध्य किया जाएगा।

    पंचांग

    • सूर्योदय - सुबह 06 बजकर 36 मिनट पर
    • सूर्यास्त - शाम 05 बजकर 33 मिनट पर
    • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 52 मिनट से 05 बजकर 44 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त - दोपहर 01 बजकर 54 मिनट से 02 बजकर 38 मिनट तक
    • गोधूलि मुहूर्त - शाम 05 बजकर 33 मिनट से 05 बजकर 59 मिनट तक
    • निशिता मुहूर्त - रात्रि 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।